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ईरान के अड़ जाने के बाद नर्म पड़े डोनाल्ड ट्रंप

संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने का हुआ एलान

एजेंसियां

वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ जारी संघर्ष विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब पूर्व निर्धारित संघर्ष विराम समाप्त होने में कुछ ही घंटे शेष थे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को जारी रखना है, ताकि सात सप्ताह से चल रहे उस विनाशकारी युद्ध को समाप्त किया जा सके जिसने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, जो इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, जब तक ईरान के नेता और प्रतिनिधि एक एकीकृत शांति प्रस्ताव लेकर नहीं आते, तब तक हमने ईरान पर अपने हमले रोकने का फैसला किया है।

हालांकि, ट्रंप का यह ऐलान एकतरफा प्रतीत होता है, और यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान या अमेरिका का सहयोगी देश इजराइल इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे। साथ ही, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों और तटों की घेराबंदी (ब्लॉकैड) जारी रहेगी, जिसे ईरान पहले ही युद्ध की कार्रवाई करार दे चुका है।

ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी तसनीम समाचार एजेंसी ने कहा है कि ईरान ने संघर्ष विराम बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं किया था। ईरान ने अमेरिकी घेराबंदी को बलपूर्वक तोड़ने की अपनी धमकी को फिर से दोहराया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने सोशल मीडिया पर इस घोषणा को समय हासिल करने की एक चाल बताया और कहा कि ईरान के लिए पहल करने का समय आ गया है।

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी 2024 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। ट्रंप ने अपने बयान में संकेत दिया कि ईरानी सरकार वर्तमान में आंतरिक रूप से खंडित है, जो संभवतः सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कुछ शीर्ष नेताओं की हत्याओं का संदर्भ था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहले ही नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियों की निंदा की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे राजनयिक प्रयासों को सफलता मिलेगी। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाले शांति वार्ता के अगले दौर पर टिकी हैं।