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भाजपा के देशव्यापी प्रचार के बाद कांग्रेस का अभियान

महिला आरक्षण पर पीछे हटने को तैयार नहीं

  • महिला कांग्रेस की अगुवाई में कार्यक्रम

  • हस्ताक्षर और पोस्टकार्ड अभियान

  • केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए महिला कांग्रेस ने एक व्यापक विरोध कार्यक्रम तैयार किया है। इस रणनीति के तहत देश भर में हस्ताक्षर अभियान चलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड भेजने की योजना बनाई गई है, ताकि सरकार पर 543 लोकसभा सीटों के भीतर 33 प्रतिशत महिला कोटा जल्द से जल्द लागू करने का दबाव बनाया जा सके।

राज्य की राजधानियों में भाजपा का पुतला फूंकने जैसे कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं, और अब महिला कांग्रेस इस विरोध को जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ नेताओं को फेसबुक लाइव के माध्यम से इस मांग को मजबूती से उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने बताया कि पिछले दो दिनों में दिल्ली और जयपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि अन्य राज्यों में और भी प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्यसभा सांसद और केरल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष जेबी माथेर ने कहा कि गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में लोक भवन मार्च आयोजित किया जा रहा है।

यह हस्ताक्षर और पोस्टकार्ड अभियान मंगलवार से शुरू होने जा रहा है, जिसका मुख्य संदेश होगा — महिला आरक्षण लागू करो – इसे आज करो, अभी करो, और आरक्षण में ओबीसी महिलाओं को शामिल करो। अलका लांबा ने कहा, प्रधानमंत्री और भाजपा देश को गुमराह कर रहे हैं। हमारे पास पहले से ही महिला आरक्षण कानून है। हम सरकार पर दबाव डालेंगे कि यदि संभव हो तो मानसून सत्र से पहले, अन्यथा मानसून सत्र में 543 सीटों पर ओबीसी आरक्षण के साथ महिला कोटे के तत्काल कार्यान्वयन के लिए एक विधेयक लाया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनावों का वर्तमान दौर समाप्त होने के बाद सरकार किसी भी समय सर्वदलीय बैठक बुला सकती है और मौजूदा 543 सीटों में महिला कोटा लागू करने का प्रस्ताव पेश कर सकती है।

जेबी माथेर ने सरकार द्वारा मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत कोटा लागू करने से इनकार करने पर हैरानी जताई। उन्होंने आरोप लगाया, भाजपा-आरएसएस महिलाओं को दूसरे दर्जे का नागरिक मानते हैं और उन्हें सशक्त नहीं करना चाहते। इसीलिए यह सारा तमाशा रचा गया।

उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार में कोई गंभीरता नहीं दिखी और जिस तरह से परामर्श किए गए और बाद में लोकसभा में विधेयक लाया गया, वह महिलाओं की वास्तविक मांगों को प्रतिबिंबित नहीं करता था। माथेर के अनुसार, मोदी सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं बल्कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को पारित करवाना था। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री को महिलाओं को धोखा देने और उन्हें परिसीमन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।