Rewa Central Jail: रीवा केंद्रीय जेल में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
रीवा : केंद्रीय जेल में तैनात प्रधान आरक्षक ने जान क्यों दी, क्या वह तनाव में थे, उन्हें कौन कर रहा था प्रताड़ित? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है. गुरुवार दोपहर प्रधान आरक्षक का शव जेल परिसर मे स्थित गौशाला मे लगे टीन शेड में मिला था. बिछिया थाना पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया. मृतक की जेब से एक पत्र मिला है. इसी पत्र में मौत का राज छुपा है. इस बारे में पुलिस ने जांच का हवाला दिया है.
परिजन बोले- वह काफी दिन से परेशान थे
मृतक की जेब से मिले पत्र की पुलिस जांच कर रही है. पीड़ित बेटे वरुण का कहना है “उनके पिता प्रधान आरक्षक रामानंद पटेल पन्ना जिले के देवेंद्र नगर स्थित वेंदिया गांव के निवासी थे. वह जेल कॉलोनी मे निवासरत थे. वह 20 वर्षों से रीवा मे अपनी सेवाएं दे रहे थे. पिछले कुछ दिनों से वह काफी परेशान थे. हाल ही मे वह 10 दिन की छुट्टियों पर भी थे. इस दरमियान उन्होंने अपनी परेशानी परिवार के किसी सदस्य से साझा नहीं की.”
पीड़ित परिजनों ने पत्र दिखाने की मांग की
मृतक की जेब में मिले पत्र को लेकर परिजनों को जानकारी नहीं मिल पा रही है कि आखिरकार ऐसा उसमें क्या लिखा है. परिजनों का कहना है “जेल के कुछ कार्यों को लेकर वे परेशान थे. घटना के बाद मौके पर ही जेल अधिकारी आए थे और कुछ देर बाद वह चले गए जबकि अस्पताल मे कोई अधिकारी नहीं पहुंचा. हमारी मांग है वह पत्र दिखाया जाए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए.”
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
CSP राजीव पाठक ने बताया” जेल प्रहरी रामानंद पटेल द्वारा जान देने के मामले में बिछिया थाना पुलिस ने मर्ग कायम किया है. घटना की जांच की जा रही है. जो भी बिंदु सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर ऐसी कौन सी स्थिति बनी, जिस कारण जेल प्रहरी को जान देनी पड़ी. किसी के द्वारा प्रताड़ित किया गया या फिर अन्य कोई वजह है यह जांच का विषय है.”
जेल के किसी अधिकारी को समस्या नहीं बताई
रीवा केंद्रीय जेल के अधीक्षक एस.के. उपाध्याय ने कहा “मुख्य प्रहरी रमानंद पटेल गुरुवार सुबह 8 से 12 के बीच ड्यूटी पूरी करने के बाद गौशाला की तरफ गए और जान दे दी. उनकी जेब से एक पत्र मिला है. पुलिस उस पत्र की जांच कर रही है. अगर उन्हें कोई प्रताड़ित कर रहा था तो उन्हें इसकी जानकारी अधिकारियों को देनी चाहिए थी. उनका स्वभाव बेहतर था और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते थे. वर्ष 2009 से केंद्रीय जेल मे वह पदस्थ थे.”