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खगोल विज्ञान की एक और नई पहेली सामने आ गयी

विशाल ग्रह छोटे तारे के चक्कर लगा रहा

  • टीओआई-5205बी इसका नाम रखा है

  • पहले इसकी कल्पना नहीं की गयी थी

  • दोनों का अनुपात बहुत असामान्य है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोल विज्ञान के क्षेत्र में हाल ही में हुई यह खोज सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों के बारे में हमारी समझ को चुनौती दे रही है। वर्जित ग्रह के रूप में जाना जाने वाला टीओआई-5205बी एक ऐसी खोज है जिसने वैज्ञानिकों को ग्रहों के निर्माण के बुनियादी सिद्धांतों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

आम तौर पर, एक ग्रह का निर्माण उसके मातृ तारे के चारों ओर मौजूद धूल और गैस के डिस्क से होता है। वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, तारे का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उसके आसपास ग्रह बनाने वाली सामग्री उतनी ही अधिक होगी। इसके विपरीत, छोटे तारों के पास बड़े ग्रह बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं होनी चाहिए। लेकिन टीओआई-5205बी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है।

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यह ग्रह एक लाल बौने तारे की परिक्रमा कर रहा है, जिसका नाम टीओआई-5205 है। यह तारा हमारे सूर्य के आकार और द्रव्यमान का लगभग 40 प्रतिशत ही है। आश्चर्य की बात यह है कि इसके चारों ओर घूमने वाला ग्रह टीओआई-5205बी लगभग हमारे बृहस्पति ग्रह के आकार का है।

जब यह विशाल ग्रह अपने छोटे से तारे के सामने से गुजरता है, तो यह तारे की लगभग 7 फीसद रोशनी को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देता है। तुलनात्मक रूप से, जब बृहस्पति सूर्य के सामने से गुजरता है, तो वह केवल 1 फीसद से भी कम रोशनी रोकता है। इस भारी गिरावट के कारण ही खगोलविदों ने इसे एक बड़े मटर के दाने के सामने एक कंचे जैसी स्थिति बताया है।

2026 में प्राप्त नवीनतम डेटा और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के अवलोकनों ने इस ग्रह के रहस्य को और गहरा कर दिया है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के उपकरणों ने इस ग्रह के वायुमंडल का विश्लेषण किया है, जिसमें मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसों के स्पष्ट संकेत मिले हैं। यह डेटा वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहा है कि क्या यह ग्रह अपने वर्तमान स्थान पर बना था या यह अंतरिक्ष के किसी और ठंडे हिस्से में विकसित होकर अपने तारे के करीब आ गया।

यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें बताती है कि ग्रह निर्माण की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक लचीली और विविध हो सकती है। यदि टीओआई-5205बी जैसे विशाल ग्रह इतने छोटे तारों के चारों ओर बन सकते हैं, तो इसका मतलब है कि ब्रह्मांड में ऐसे और भी कई ग्रह हो सकते हैं जिन्हें हम अब तक असंभव मानकर अनदेखा कर रहे थे। भविष्य के शोध अब इस बात पर केंद्रित हैं कि कैसे एक छोटे डिस्क से इतना विशाल गैस दानव तैयार हो गया।

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