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अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अब सत्ता पक्ष को नसीहत दी

सदन की कार्यवाही के दौरान सरकारी पक्ष की अनुपस्थिति गलत

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन की कार्यवाही के दौरान अनुशासन और मर्यादा को लेकर कड़ा रुख अपनाया। प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी की अनुपस्थिति को अध्यक्ष ने गंभीरता से लिया। श्री बिरला ने संसदीय कार्य मंत्री को स्पष्ट निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए।

सदन में चर्चा के लिए एमएसएमई मंत्रालय की एस्पायर योजना के तहत प्रशिक्षित लाभार्थियों की संख्या से संबंधित एक महत्वपूर्ण सवाल सूचीबद्ध था। जब यह सवाल पुकारा गया, तो संबंधित मंत्री जीतन राम मांझी सदन में मौजूद नहीं थे। इस पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष ने पूछा, एमएसएमई के राज्य मंत्री कौन हैं? उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को इस मामले को रिकॉर्ड में लेने का निर्देश देते हुए कहा, कृपया इसे नोट करें। सुनिश्चित करें कि ऐसा दोबारा न हो। 2024 में एमएसएमई मंत्रालय का कार्यभार संभालने वाले मांझी बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख हैं।

शून्यकाल के दौरान अध्यक्ष ओम बिरला ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को सदन के भीतर लंबी बातचीत करने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने देखा कि बहस के दौरान कई सदस्य और मंत्री आपस में काफी देर तक चर्चा करते रहते हैं। श्री बिरला ने कहा, मैंने देखा है कि सदस्य और मंत्री आधे-आधे घंटे तक एक-दूसरे से बात करते हैं। संक्षिप्त और आवश्यक बातचीत की अनुमति है, लेकिन लंबी गपशप सदन की मर्यादा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि भविष्य में वे ऐसे सदस्यों का नाम लेंगे। संसदीय प्रक्रिया में अध्यक्ष द्वारा किसी सदस्य का नाम लेना एक गंभीर भर्त्सना मानी जाती है।

कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी टोकते हुए सावधानी बरतने को कहा। श्री यादव सदन में अध्यक्ष की ओर पीठ करके दूसरे सदस्य से बात कर रहे थे। इस पर बिरला ने कहा कि उनके जैसे वरिष्ठ सांसद को ऐसे आचरण से बचना चाहिए क्योंकि इससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है। अध्यक्ष के इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य संसदीय कार्यवाही की गंभीरता को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रश्नकाल जैसे महत्वपूर्ण समय में सरकार की जवाबदेही बनी रहे। इन चेतावनियों के बाद सदन के माहौल में एक स्पष्ट गंभीरता देखी गई।