यह डबल इंजन नहीं दोहरी गुलामी वाली सरकारः प्रियंका गांधी
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हम असम को आत्मनिर्भर बनायेंगे
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चाय बागानों का दौर कर रहे हैं पीएम
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दोबारा चुनाव लड़ रहे लोगों की संपत्ति बढ़ी
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के रण में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। 1 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ के चाय बागानों का दौरा कर श्रमिकों के साथ आत्मीयता दिखाई, वहीं चुनावी सभाओं में कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। दूसरी ओर, प्रियंका गांधी वाड्रा ने पलटवार करते हुए सरकार को गुलाम करार दिया, जबकि एडीआर की रिपोर्ट ने उम्मीदवारों के धनबल और बाहुबल की पोल खोल दी है।
बिस्वनाथ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा असम की पहचान और सुरक्षा के साथ समझौता किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजाद भारत में कांग्रेस ही भ्रष्टाचार की जननी रही है। मोदी ने घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता के लिए अवैध घुसपैठियों को मुख्यधारा में शामिल किया। उन्होंने असम को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि आज राज्य का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र वैश्विक संघर्षों के बीच देश की ताकत बनकर उभरा है।
नजीरा में एक रैली के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने डबल इंजन सरकार के नारे पर तंज कसा। उन्होंने कहा, यह डबल इंजन नहीं, बल्कि दोहरी गुलामी वाली सरकार है। मोदी जी अमेरिका के गुलाम बन गए हैं और हिमंत बिस्वा सरमा, मोदी जी के गुलाम हैं। उन्होंने मतदाताओं से डर की राजनीति को नकारने और अपनी संस्कृति की रक्षा करने वाली सरकार चुनने की अपील की।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की नवीनतम रिपोर्ट ने 722 उम्मीदवारों के विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। यहां के लगभग 14 फीसद उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें एआईयूडीएफ के 37 फीसद, कांग्रेस के 28 फीसद और भाजपा के 9 फीसद उम्मीदवार शामिल हैं। 11 फीसद उम्मीदवारों पर हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले हैं।
चुनावी मैदान में 39 फीसद उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 28 फीसद था। भाजपा के 88 फीसद और कांग्रेस के 61 फीसद उम्मीदवार इस श्रेणी में हैं।राहुल रॉय (261 करोड़+) सबसे अमीर उम्मीदवार बनकर उभरे हैं, उनके बाद बदरुद्दीन अजमल (226 करोड़+) का स्थान है। दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायकों की औसत संपत्ति में पिछले पांच वर्षों में 80 फीसद की भारी वृद्धि देखी गई है। शिक्षा के स्तर पर 53 फीसद उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, लेकिन महिला उम्मीदवारों की भागीदारी मात्र 8 फीसद है, जो चुनावी प्रक्रिया में लैंगिक असमानता को दर्शाती है।