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अपने युद्ध की कीमत दूसरों से वसूलता है अमेरिका

दूसरे विश्वयुद्ध से अब तक का इतिहास यह बताता है

लंदनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति को कड़ाई से लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट के हालिया बयान के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि ईरान के साथ जारी युद्ध में होने वाले खर्च का बोझ अरब देशों पर डाला जाए।

लेविट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति इस विचार में काफी रुचि रखते हैं कि इस क्षेत्रीय संघर्ष का वित्तीय भार उन सहयोगियों द्वारा वहन किया जाए जिन्हें अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से प्रत्यक्ष लाभ होता है। यह रणनीति नई नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध 1990 के खाड़ी युद्ध से है। उस समय भी वाशिंगटन ने अपने सहयोगियों से वित्तीय मदद ली थी ताकि कुवैत से इराकी सेना को हटाने के अभियान का खर्च निकाला जा सके। वर्तमान परिदृश्य में, ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोले बिना भी युद्ध समाप्त करने के पक्ष में हो सकते हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध, जिसकी शुरुआत 1939 में पोलैंड पर जर्मनी के आक्रमण के साथ हुई थी, ने दुनिया के आर्थिक भूगोल को पूरी तरह बदल दिया। जब 1941 में जापान ने पर्ल हार्बर पर हमला किया, तो अमेरिका इस महायुद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो गया। 1945 में जर्मनी और जापान के आत्मसमर्पण के बाद, अमेरिका ने यूरोप के पुनर्निर्माण के लिए मार्शल प्लान (1948-1951) लागू किया। इसके तहत 13 बिलियन डॉलर से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करना और सोवियत प्रभाव को रोकना था।

आज भी, जर्मनी और जापान अपने क्षेत्रों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों के रखरखाव पर सालाना अरबों डॉलर खर्च करते हैं। जापान इसके लिए लगभग 1.4 बिलियन और जर्मनी 1 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि प्रतिवर्ष देता है। यह इस तथ्य को पुष्ट करता है कि अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से अपनी सैन्य उपस्थिति और सुरक्षा गारंटी के बदले सहयोगी देशों से वित्तीय योगदान सुनिश्चित किया है।

फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए पूर्ण पैमाने पर आक्रमण ने शीत युद्ध के बाद के सबसे बड़े सुरक्षा संकट को जन्म दिया। शुरुआत में, अमेरिका यूक्रेन का सबसे बड़ा सैन्य और वित्तीय समर्थक बनकर उभरा। जनवरी 2022 से जून 2025 के बीच, वाशिंगटन ने यूक्रेन को कुल 114.64 बिलियन यूरो की रिकॉर्ड सहायता दी, जिसमें सैन्य, वित्तीय और मानवीय सहायता शामिल थी। इसके बाद यूरोपीय संघ और जर्मनी जैसे देशों का स्थान रहा।

लेकिन जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प की सत्ता में वापसी के साथ ही समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। ट्रम्प ने पूर्व की सहायता में 99 फीसद तक की कटौती कर दी है और स्पष्ट कर दिया है कि अब इस युद्ध का वित्तीय बोझ पूरी तरह यूरोपीय देशों को उठाना होगा। इस बदलाव ने 2024 में अमेरिका की विदेशी हथियार बिक्री को 318.7 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया है। वाशिंगटन की वर्तमान रणनीति यह है कि वह प्रत्यक्ष रूप से युद्ध का खर्च उठाने के बजाय, अपने सहयोगियों को रक्षा बजट बढ़ाने और अमेरिकी रक्षा उपकरणों को खरीदने के लिए प्रेरित करे, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ हो।