पश्चिम एशिया युद्ध पर मोदी और राहुल के बीच बयान युद्ध
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब भारत की घरेलू राजनीति के केंद्र में आ गया है। मंगलवार (31 मार्च, 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। प्रधानमंत्री मोदी ने जहाँ विपक्ष पर संकट के समय राजनीति करने का आरोप लगाया, वहीं राहुल गांधी ने आने वाले समय में एक वित्तीय भूकंप की चेतावनी देते हुए सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए।
गुजरात के वाव-थराद में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत की प्रभावी विदेश नीति और नागरिकों की अटूट एकता ने वैश्विक संकट के बावजूद देश में स्थिति को नियंत्रण में रखा है।
उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया की स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। डीजल, पेट्रोल और गैस जैसी ऊर्जा आवश्यकताओं को लेकर दुनिया भर में मुश्किलें बढ़ी हैं, लेकिन भारत ने अपने नागरिकों को इसके प्रभाव से सुरक्षित रखा है। कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए पीएम ने उन्हें राजनीतिक गिद्ध करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चाहती है कि संघर्ष और बढ़े ताकि वे इसका राजनीतिक लाभ उठा सकें। मोदी ने कहा, कांग्रेस डर और अफवाहें फैलाने में व्यस्त है। वे जनता को उकसा रहे हैं और गिद्धों की तरह इस इंतजार में हैं कि देश की मुश्किलें बढ़ें।
दूसरी ओर, केरल के कोझिकोड में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने जनता को आगाह किया कि पश्चिम एशिया का यह त्रासदी भरा नाटक जल्द ही भारत में एक वित्तीय भूकंप लेकर आएगा। केरल के संदर्भ में—जहाँ से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं—राहुल ने कहा कि इस युद्ध का सीधा असर यहाँ के परिवारों पर पड़ेगा। उन्होंने भविष्यवाणी की कि अगले एक-दो महीनों में ईंधन की कीमतें आसमान छुएँगी और महंगाई बेलगाम हो जाएगी। राहुल ने केंद्र की एनडीए सरकार और केरल की एलडीएफ सरकार दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए विवादास्पद बयान दिया कि मोदी कुछ नहीं कर सकते, उन्हें (अमेरिकी राष्ट्रपति) डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने भारत के कृषि, ऊर्जा और डेटा से जुड़े हितों को अमेरिका के पास गिरवी रख दिया है। राहुल ने सवाल किया कि जब देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी का बजट खतरे में है, तो सरकार संसद में इस पर चर्चा करने से क्यों कतरा रही है। दोनों नेताओं के बीच यह तीखी नोकझोंक आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ईंधन की कीमतें और वैश्विक अस्थिरता अब सीधे तौर पर चुनावी मुद्दा बन गई हैं।