अप्रैल के अंत तक बढ़ जाएगी भारत की सैन्य शक्ति
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल होने जा रही है। सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना की एक टीम चौथे एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम के निरीक्षण के लिए रूस पहुँच चुकी है। उम्मीद है कि यह प्रणाली अप्रैल 2026 के अंत तक भारत आ जाएगी और इसे पश्चिमी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस चौथी इकाई को रणनीतिक रूप से राजस्थान में तैनात किए जाने की संभावना है, जो सीमा पार से होने वाली किसी भी हवाई गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा। पांचवें एस-400 सिस्टम के इस साल नवंबर तक तैनात होने की उम्मीद है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में पांच अतिरिक्त प्रणालियों को मंजूरी दी है, जिससे भारत के पास कुल एस-400 इकाइयों की संख्या 10 हो जाएगी। भारत ने 2018 में रूस के साथ सरकारी स्तर पर पांच इकाइयों का सौदा किया था। नई मंजूरी के बाद अगले एक वर्ष में अतिरिक्त प्रणालियों की खरीद प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
भारतीय वायुसेना ने एस-400 के साथ-साथ रूस के पैंटसिर शॉर्ट-रेंज सिस्टम की खरीद का भी प्रस्ताव दिया है। यह प्रणाली विशेष रूप से आर्म्ड और कामिकेज़ ड्रोनों को नष्ट करने में सक्षम है। एस-400 और पैंटसिर को एक साथ जोड़कर एक द्वि-स्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकता है, जो सीमा पार से दागी गई किसी भी हवाई वस्तु को प्रभावी ढंग से मार गिराने में सक्षम होगा।
एस-400 की प्रभावशीलता का प्रमाण पिछले साल मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिला था। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस प्रणाली का व्यापक उपयोग करते हुए पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, अर्ली वार्निंग विमानों, खुफिया जानकारी जुटाने वाले विमानों और सशस्त्र ड्रोनों को सफलतापूर्वक मार गिराया था। एस-400 की नई खेद आने से भारत की न केवल रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी भारत के पक्ष में मजबूत करेगा।