इस बार डिजिटल माध्यम और जाति जनगणना पर जोर
-
देश की सोलहवीं जनगणना होगी
-
महापंजीयक ने प्रेस को जानकारी दी
-
इस बार स्वगणना की सुविधा भी होगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना अगले महीने की पहली तारीख, यानी 1 अप्रैल 2027 से शुरू होने जा रही है। नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जानकारी दी कि इस बार की जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार की जाएगी और स्व-गणना की सुविधा प्रदान की जाएगी।
आयुक्त ने बताया कि स्व-गणना की सुविधा इस वर्ष 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच 15 दिनों की अवधि के लिए उपलब्ध होगी, जिसकी समय-सारणी अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। प्रत्येक राज्य में स्व-गणना पूरी होने के बाद, 30 सितंबर तक 30 दिनों की अवधि में मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए, स्व-गणना पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका पूरी तरह से डिजिटल होना है। श्री नारायण ने स्पष्ट किया कि डेटा संग्रह एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया जाएगा। इसके प्रबंधन और निगरानी के लिए एक वेब-आधारित पोर्टल का उपयोग होगा, जबकि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाने के लिए वेब मैपिंग एप्लिकेशन की मदद ली जाएगी। पहले चरण के प्रश्न पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण के प्रश्न उचित समय पर प्रकाशित किए जाएंगे।
एक अन्य प्रमुख घोषणा में जनगणना आयुक्त ने बताया कि जाति आधारित गणना जनगणना के दूसरे चरण में की जाएगी। यह कदम सामाजिक-आर्थिक डेटा के विश्लेषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीक के इस व्यापक उपयोग से न केवल डेटा की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि जनगणना की प्रक्रिया में लगने वाले समय में भी कमी आने की उम्मीद है। यह आधुनिक भारत के जनसांख्यिकीय ढांचे को समझने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।