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मणिपुर के चुराचांदपुर में नये सिरे से हिंसा भड़की

उग्र भीड़ का कुकी जो काउंसिल नेता के घर पर हमला

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः मणिपुर के चुराचांदपुर जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहाँ आज दोपहर उत्तेजित भीड़ ने कुकी ज़ो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियेंथांग थांगलेट के निजी आवास को निशाना बनाया। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि राज्य में शांति बहाली की प्रक्रिया में मौजूद गहरी चुनौतियों को भी उजागर करती है।

प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, हमलावरों की इस भीड़ में मुख्य रूप से स्थानीय युवा शामिल थे, जो अत्यंत आक्रोशित नजर आ रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ ने पहले थांगलेट के घर को घेर लिया और अंधाधुंध पथराव शुरू कर दिया, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुँचा।

पथराव के बाद, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर घर के भीतर जबरन घुसने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वहां तैनात सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी ने भीड़ को घर के मुख्य हिस्से तक पहुँचने से रोक दिया, अन्यथा जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। उग्र भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को अंततः आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा।

यह हमला राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है। गौरतलब है कि इस घटना से महज 24 घंटे पहले, मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद ने गुवाहाटी में कुकी ज़ो काउंसिल के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। संघर्ष प्रभावित मणिपुर में स्थायी शांति लाने के लिए महीनों बाद सरकार और समुदायों के बीच संवाद का यह एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

आज सुबह ही कुकी ज़ो काउंसिल ने इस बैठक के संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया था। परिषद के अनुसार, कल शाम 7:00 बजे शुरू हुई यह वार्ता लगभग 1 घंटे 45 मिनट तक चली थी। केजेसी ने इसे एक सकारात्मक ‘आइस-ब्रेकिंग’ सत्र (संवाद का प्रथम चरण) बताया था, जहाँ लंबे समय से जमी चुप्पी टूटी थी। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने समुदाय की सुरक्षा, पुनर्वास और राजनीतिक समाधान जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने बहुत ध्यान से सुना था।

शांति वार्ता की इस सकारात्मक पहल के ठीक बाद अध्यक्ष के घर पर हुआ यह हमला स्पष्ट करता है कि जमीन पर अभी भी भारी असंतोष और अविश्वास व्याप्त है। यह घटना दर्शाती है कि शांति की ऊपरी कोशिशों और जमीनी भावनाओं के बीच एक बड़ी खाई है, जिसे पाटना राज्य सरकार और नागरिक समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।