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Maa Sharda Bhakti: मैहर मंदिर की वो ‘कठिन’ यात्रा, हाथ टूटने पर भी नहीं माना हार; 18 साल से लगातार दर्शन कर रहे सतेंद्र की अनोखी कहानी

विदिशा: सनातन आस्था और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करते हुए विदिशा के निवासी सतेंद्र कुमार मित्रा एक बार फिर मैहर स्थित मां शारदा के दरबार के लिए रवाना हुए हैं. खास बात यह है कि हाथ में फ्रैक्चर जैसी शारीरिक परेशानी के बावजूद उनकी वर्षों पुरानी यात्रा नहीं रुकी, बल्कि उन्होंने अपनी साधन को बदला और आस्था का सिलसिला जारी रखा.

18 वर्षों तक साइकिल से मैहर की यात्रा
जानकारी के अनुसार, सतेंद्र कुमार मित्रा पिछले 18 वर्षों तक साइकिल से करीब 400 किलोमीटर दूर मैहर की यात्रा करते रहे हैं. हालांकि कुछ वर्ष पूर्व उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया, जिसके बाद उन्होंने साइकिल की जगह बाइक से यात्रा करना शुरू कर दिया. अब वे पिछले वर्षों से दोपहिया वाहन के माध्यम से यह यात्रा पूरी कर रहे हैं. आने-जाने सहित यह यात्रा लगभग 800 किलोमीटर की होती है. इस वर्ष भी वे अपने साथियों के साथ पांच दोपहिया वाहनों के जरिए मैहर के लिए रवाना हुए हैं.

देश में अमन-चैन और भाईचारा कायम रखने के लिए यात्रा
यात्रा पर निकलने से पहले समाजसेवी गोविंद देवलिया, देवेश आर्य, अतुल शाह सहित अन्य लोगों ने यात्रियों का शाल-श्रीफल से सम्मान कर उन्हें शुभकामनाएं दीं. सतेंद्र कुमार मित्रा ने बताया कि, ”वे मां शारदा के दर्शन के लिए निकले हैं और उनका उद्देश्य देश में अमन-चैन, शांति और भाईचारा बनाए रखना है. साथ ही लोग पर्यावरण के प्रति भी जागरूक हों.” उन्होंने कहा कि, ”वे लगातार 18 वर्षों तक साइकिल से यह यात्रा करते रहे हैं, लेकिन हाथ में फ्रैक्चर के बाद अब बाइक से यात्रा कर रहे हैं.”

संतोष नामदेव ने बताया कि, ”उनके मन में भी मां शारदा के दर्शन की इच्छा हुई, जिसके चलते वे इस यात्रा में शामिल हुए हैं.” उन्होंने कहा कि, ”उनकी मन्नत है कि देश खुशहाल रहे और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे.” यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी देती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अगर संकल्प मजबूत हो तो राहें अपने आप बन जाती हैं.