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जगन रेड्डी का संपत्ति विवाद भड़का

पुत्री शर्मिला के पक्ष में खड़ी हुई मां विजयम्मा भी

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के परिवार के भीतर सुलग रहा संपत्ति विवाद अब एक पूर्ण सार्वजनिक कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। इस विवाद ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब जगन की मां, विजयम्मा ने अदालत में एक नोटरीकृत हलफनामा दाखिल कर अपने ही बेटे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और अपनी बेटी वाई.एस. शर्मिला के दावों का पुरजोर समर्थन किया। जो विवाद अब तक भाई-बहन के बीच का निजी मतभेद माना जा रहा था, वह अब मां के हस्तक्षेप के बाद गहरे राजनीतिक और व्यक्तिगत संकट में बदल गया है।

विजयम्मा ने अपने कड़े शब्दों वाले हलफनामे में स्पष्ट किया कि 2009 में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के निधन तक जितनी भी संपत्तियां अर्जित की गई थीं, वे सभी संयुक्त पारिवारिक संपत्तियां हैं। उन्होंने दावा किया कि वाईएसआर की स्पष्ट मंशा थी कि इन संपत्तियों को उनके चारों पोते-पोतियों के बीच समान रूप से वितरित किया जाए। विजयम्मा के अनुसार, यह तथ्य परिवार के करीबी सहयोगियों को भी अच्छी तरह पता था। उन्होंने आरोप लगाया कि जगन ने इस इच्छा की अनदेखी की है।

हलफनामे में आगे कहा गया है कि जगन ने पहले एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से शर्मिला के हक को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में वे अपनी बातों से मुकर गए। विजयम्मा ने बताया कि सरस्वती सीमेंट और येलहंका स्थित जमीन जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों को जानबूझकर उस समझौते से बाहर रखा गया था, जबकि उन पर शर्मिला का कानूनी अधिकार था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शर्मिला को अब तक जो पैसा दिया गया, वह केवल उनके हिस्से का लाभांश था, न कि कोई अंतिम निपटारा या फाइनल सेटलमेंट।

अत्यधिक पीड़ा व्यक्त करते हुए विजयम्मा ने जगन पर अपनी बहन और अपने ही भतीजे-भतीजियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक तीखी टिप्पणी में कहा, सच्चाई केवल मेरे ईश्वर और मेरे बेटे को पता है। उन्होंने जगन से उनके खिलाफ किए जा रहे कथित झूठे प्रचार को तुरंत रोकने की अपील की। हलफनामे के अंत में उन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ लेते हुए कहा कि उनका हर शब्द सत्य है। इस कदम ने जगन रेड्डी को उनकी मां और बहन दोनों के खिलाफ खड़ा कर दिया है, जिससे आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी हड़कंप मच गया है।