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Jabalpur Youth Innovation: जबलपुर के युवाओं का गजब जुगाड़, तैयार किया लो-कॉस्ट फ्लोटर; कम खर्च में उठाएं वाटर राइड का मजा

जबलपुर: तैरने का शौक ज्यादातर लोगों को होता है, लेकिन गहरे पानी से लोगों को डर लगता है, इसलिए शौक होने के बाद भी लोग तैरना नहीं सीख पाते. जबलपुर के कुछ युवाओं ने एक ऐसा जुगाड़ बनाया है, जिससे तैराकी सीखने वाले लोगों का डर खत्म हो जाता है और इस जुगाड़ की वजह से वे तैरने के दौरान डूब नहीं सकते. इस जुगाड़ को फ्लोटर नाम दिया गया है. इसकी वजह से सैकड़ों लोग तैरना सीख पाए.

जबलपुर तैराकी मंडल

जबलपुर शहर से होकर नर्मदा नदी बहती है, शहर से लगे हुए नर्मदा नदी के कई घाट हैं. इनमे से कालीघाट, ग्वारीघाट, जिलहरी घाट और तिलवारा घाट पर तैरना सीखने वाले लोग पहुंचते हैं. सबसे ज्यादा भीड़ जिलहरी घाट में होती है. यहां नदी के बहाव के साथ एक नेचुरल स्विमिंग पूल बनता है. इसलिए इस घाट पर तैरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है. यहां पर एक नित्य तैराकी मंडल भी है, जो करीब 300 लोगों का एक समूह है. जो पूरे साल इस घाट पर तैरने के लिए आते हैं. गर्मी में तैरना सीखने वालों की तादाद और ज्यादा बढ़ जाती है.

यहां नदी गहरी भी है और नदी का बहाव भी तेज होता है, इसलिए जिसे तैरना नहीं आता, उसे नदी में उतरने से डर लगता है, क्योंकि अक्सर नर्मदा नदी में तैरना न जानने वालों की पानी में डूबने की वजह से मौत भी हो जाती है. कुछ दिन पहले ही इंजीनियरिंग के दो छात्र जिलहरी घाट में गहरे पानी में उतर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई.

तैराकी सीखने वालों के लिए नया जुगाड़

यहीं पर शिवा विश्वकर्मा स्विमिंग सीखने के शौकीन लोगों को तैरना सिखाते हैं. शिवा विश्वकर्मा नित्य तैराकी मंडल से भी जुड़े हुए हैं. शिवा विश्वकर्मा ने बताया कि “जब कोई नया आदमी तैरना सीखने के लिए आता है, तो उसे नदी में उतारने से डर लगता है. हम यहां सभी को लाइव जैकेट तो नहीं दे सकते, क्योंकि लाइव जैकेट काफी महंगी है. एक ठीक-ठाक लाइव जैकेट की कीमत डेढ़ हजार रुपए तक होती है. इसलिए हम लोगों ने एक जुगाड़ बनाया, इसे हम फ्लोटर कहते हैं.

फ्लोटर के सहारे उतर सकते हैं पानी में

फ्लोटर लगभग 1×1 फीट मोटे फोम का टुकड़ा होता है. यह सफेद कलर का फोम गद्दे बनाने के काम में आता है और इसमें पानी नहीं भरता. पानी पर यह तैरता रहता है, इसे पुरानी साड़ी या चुनरी से बांध दिया जाता है. शिवा विश्वकर्मा का कहना है इसे तैरने वाले की कमर में बांध दिया जाता है. इसे बांधकर जब तैराकी सिखाने वाले लोग नदी में उतरते हैं, तो उन्हें डूबने का डर नहीं रहता. शिवा का कहना है कि यह छोटा सा टुकड़ा लोगों की जान बचा लेता है और तैरना सीखने वाले लोगों के आत्मविश्वास को बढ़ा देता है.”

70 रुपए में तैयार किया फ्लोटर

शिवा विश्वकर्मा प्रोफेशनल तैराक हैं. उनका कहना है कि हमारा फ्लोटर मात्र ₹70 में बनकर तैयार हो जाता है. इसलिए जिन लोगों के पास पैसा नहीं है, वे भी इसका इस्तेमाल करके तैरना सीख सकते हैं. संजीव विश्वकर्मा एक प्रोफेशनल तैराक नहीं हैं, लेकिन उन्हें तैरने का शौक है. वे एक दुकान चलाते हैं. गर्मियों के समय में वे लगातार तैराकी करने के लिए आते हैं.

बिना फ्लोटर पानी में नहीं उतरते संजीव

संजीव का कहना है कि हालांकि उन्होंने पिछले साल तेराकी सीख ली थी, लेकिन अभी भी उन्हें डर लगता है. इसलिए वे बिना फ्लोटर के नदी में नहीं उतरते. संजीव ने बताया कि “फ्लोटर की वजह से ही वे तेराकी सीख पाए, यदि यह जुगाड़ नहीं होता तो वह नदी में नहीं उतरते.” यहां कई पुराने तैराकों ने हमें बताया कि वह बहुत अच्छे तरीके से तैर लेते हैं, लेकिन आज भी बिना फ्लोटर के नदी में नहीं उतरते. वे इसे एक हेलमेट मानते हैं. उनका कहना है कि भले ही इसकी जरूरत ना पड़े, लेकिन तैरने के दौरान इसका इस्तेमाल जीवन रक्षक की तरह काम करता है. कई बार तैरते तक तैरते जब थक जाते हैं तो इसके सहारे किनारे तक आया जा सकता है.