एलपीजी टैंकर शिवालिक सुरक्षित भारत लौटा
होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के बाद मुंद्रा पहुंचा
राष्ट्रीय खबर
मुंबई: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक अत्यंत राहतकारी खबर सामने आई है। भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक सोमवार, 16 मार्च 2026 को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से लंगर डालने में सफल रहा। इस जहाज की यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है।
इस मिशन की सफलता के पीछे भारत सरकार का कुशल कूटनीतिक प्रयास रहा है। भारतीय अधिकारियों ने ईरानी प्रशासन के साथ निरंतर और गहन समन्वय स्थापित किया ताकि जहाज को आवश्यक ट्रांजिट क्लीयरेंस मिल सके। यह समन्वय ऐसे समय में हुआ जब पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस रहा है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ा हुआ है।
शिवालिक के सुरक्षित आगमन के तत्काल बाद, एक और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक नंदा देवी के 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुँचने की प्रबल संभावना है। यह जहाज भी बड़ी मात्रा में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस लेकर आ रहा है। इन दोनों जहाजों का सफल आगमन यह सुनिश्चित करता है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति और रसोई गैस की उपलब्धता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियानों ने ईरान के परमाणु केंद्रों, मिसाइल बेस और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाया है। वाशिंगटन और तेल अवीव द्वारा ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि को इस अभियान की सबसे बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। तेहरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मुख्यालयों और संचार केंद्रों पर हुए हमलों के साथ-साथ लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली बमबारी ने इस युद्ध के दायरे को और अधिक फैला दिया है। ऐसे भयावह माहौल में भारतीय टैंकरों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक साख का प्रमाण है।