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रांची में रसोई गैस संकट से हर रोज तनाव

फुटपाथ भोजनालयों से लेकर होटलों तक पड़ गया है असर

  1. मनमानी कर रहे हैं गैस वितरक

  2. कई इलाकों में गाड़ी नहीं गयी

  3. भीड़ में तनाव, पुलिस तैनात

राष्ट्रीय खबर

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी ने शहर के स्ट्रीट फूड और छोटे खान-पान केंद्रों की कमर तोड़ दी है। एलपीजी आपूर्ति की अनिश्चितता और कमी के कारण शहर के सैकड़ों रेहड़ी-पटरी दुकानदारों और छोटे होटल संचालकों के सामने संचालन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि कई विक्रेताओं ने अपने मेनू से कई व्यंजन हटा दिए हैं, जबकि कुछ को अपनी दुकानें अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है।

कालाबाजारी और बढ़ती परिचालन लागत नियमित आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर इन छोटे व्यापारियों की जेब पर पड़ रहा है। कई दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें खुले बाजार में आसानी से कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें ब्लैक मार्केट या कालाबाजारी करने वालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर अत्यधिक ऊंचे और मनमाने दामों पर बेचे जा रहे हैं। गैस की कीमतों में अचानक हुए इस भारी इजाफे ने इन वेंडरों की परिचालन लागत  को कई गुना बढ़ा दिया है। लागत वसूलने के लिए कुछ दुकानदारों ने अब ग्राहकों पर गैस सरचार्ज या अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

मोराबादी वेंडर मार्केट की स्थिति एलपीजी की इस कमी का सबसे ज्वलंत उदाहरण शहर के सबसे व्यस्त फूड हब में से एक, मोराबादी वेंडर मार्केट में देखने को मिल रहा है। आमतौर पर सुबह से ही गुलजार रहने वाले इस बाजार में सन्नाटा पसरा है। रिपोर्टों के अनुसार, गैस की किल्लत के चलते दिन के समय होने वाला कामकाज लगभग ठप हो गया है। जो दुकानदार दिन भर नाश्ता और भोजन बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे, वे अब स्टॉक और ईंधन की कमी के कारण खाली बैठने को विवश हैं।

आजीविका पर खतरा स्ट्रीट फूड वेंडरों का कहना है कि वे दैनिक कमाई पर निर्भर हैं और एक दिन की भी बंदी उनके परिवार के आर्थिक संतुलन को बिगाड़ देती है। गैस की कालाबाजारी और आपूर्ति में भ्रम की यह स्थिति न केवल छोटे व्यापार को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि शहर की खाद्य अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। इन छोटे व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि आपूर्ति श्रृंखला को तुरंत दुरुस्त किया जाए और कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसी जाए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना व्यवसाय जारी रख सकें।