Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
छतरपुर में दबंगों की हैवानियत! दलित युवक को जूतों से पीटा, बचाने आई मां-बहन को भी नहीं बख्शा; लहूलुह... बालाघाट के जंगलों में 2 भालुओं की संदिग्ध मौत! शिकार या कुछ और? क्या वन्यजीवों की बढ़ती तादाद ही बन ... "जेन जी को कोई कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन..."—आचार्य प्रशांत ने युवाओं को दिखाया आईना; बताया भीतर छ... Bus Depot Fire: बस डिपो में भयंकर आग का तांडव, 3 बसें जलकर खाक; फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर, जान... तेलंगाना की 'लेडी अघोरी' बनीं सबसे युवा महामंडलेश्वर! 18 भाषाओं का ज्ञान और सालों की तंत्र साधना; जा... शराब की एक बोतल के लिए 'कातिल' बना पड़ोसी! जबलपुर में बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या; गाली-गलौज के बाद ख... Auraiya Road Accident: औरैया में अनियंत्रित पिकअप ने बच्चे को कुचला, हादसे के बाद चालक फरार; परिजनों... RCB in IPL 2026: आरसीबी के पास इतिहास रचने का मौका, 19वें सीजन में खिताब जीतकर मुंबई-चेन्नई की बराबर... Maharaja 2 Update: विजय सेतुपति की 'महाराजा' के सीक्वल की तैयारी शुरू? पहले पार्ट ने की थी छप्परफाड़ ... "नेतन्याहू जहाँ भी होगा, हम उसे मारेंगे"—IRGC ने दी इजराइली PM को जान से मारने की धमकी; 'बच्चों का ह...

Ladakh Protest: वांगचुक की रिहाई के बावजूद केंद्र के खिलाफ मोर्चा, 16 मार्च को लद्दाख बंद का आह्वान; छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे पर अड़ी जनता

केंद्र सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को रद्द कर दिया था. इसके बाद भी लद्दाख में 16 मार्च को होने वाले विरोध प्रदर्शन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे. माना जा रहा था कि वांगचुक की रिहाई के बाद विरोध प्रदर्शन अब नहीं होगा. दरअसल 13 मार्च को कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने ऐलान किया था कि लद्दाख के लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे क्योंकि गृह मंत्रालय केंद्र शासित प्रदेश द्वारा मांगी गई गारंटी देने में आनाकानी कर रहा है.

लद्दाख में केडीए और शीर्ष निकाय लेह नामक संगठन राज्य का सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं. बताया जा रहा है कि इन संगठनों से केंद्र की बात चल रही है. लद्दाख प्रशासन के सदस्य सज्जाद कारगिल ने कहा कि लद्दाख जिन संवैधानिक गारंटियों की मांग कर रहा है, वह कोई “व्यक्तिगत मामला” नहीं बल्कि एक सामूहिक चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, “वांगचुक की रिहाई से हमें बहुत राहत मिली है. हालांकि, वांगचुक की हिरासत का मुद्दा केंद्र सरकार ने ही खड़ा किया और सुलझाया है. हमारे विरोध प्रदर्शन और मांगें व्यापक दायरे की हैं.”

संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी

इससे पहले केडीए नेता असगर अली करबलाई ने कहा था कि लोगों का धैर्य टूट चुका है. हम भारत सरकार को बताना चाहते हैं कि हम शांत नहीं बैठेंगे. हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे. इसका प्रमुख हिस्सा राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल होना है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सोचती है, लद्दाखी जनता को हल्के में लिया जा सकता है. उन्हें लगता है कि गृह मंत्रालय पर उन पर कोई एजेंडा थोपना चाहता है. लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. केडीए नेता ने कहा कि अगर सरकार का ऐसा ही रवैया रहा तो सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा.

वांगचुक 6 महीने बाद खुली हवा में सांस लेंगे सांस

इससे पहले गृह मंत्रालय ने लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया. वांगचुक, जिन्हें लेह में हुई हिंसा के बाद 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर जोधपुर की सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था, अब लगभग 6 महीने बाद खुली हवा में सांस ले सकेंगे. उन पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) वापस ले लिया गया है.

लद्दाख से जोधपुर जेल

सोनम वांगचुक को जब लद्दाख से जोधपुर लाया गया था, तब सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क थीं। जोधपुर जेल में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया था. बताया जाता है कि वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। लेह में हुई हिंसा के बाद उन पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.