Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच संपन्न हुआ मत... दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की भी होगी सरकारी खरीद, सिकुड़े और टूटे दानो... Guna Crime: गुना में पिता के दोस्त की शर्मनाक करतूत, मासूमों से अश्लील हरकत कर बनाया वीडियो; पुलिस न... Allahabad High Court: मदरसों की जांच पर NHRC की कार्यशैली से 'स्तब्ध' हुआ हाई कोर्ट; मॉब लिंचिंग का ... PM Modi in Hardoi: 'गंगा एक्सप्रेसवे यूपी की नई लाइफलाइन', हरदोई में बरसे पीएम मोदी— बोले, सपा-कांग्... Jabalpur Crime: 'शादी डॉट कॉम' पर जिसे समझा जीवनसाथी, वो निकला शातिर ब्लैकमेलर; फर्जी DSP बनकर 5 साल... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में बकरी चोरी के आरोप में युवक को खंभे से बांधकर पीटा, रिटायर्ड कृषि अ... Vande Bharat Extension: जम्मू से श्रीनगर का सफर अब और आसान, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल को द... West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच 'दीदी' या 'दा... Unnao Road Accident: उन्नाव में भीषण सड़क हादसा, मुंडन संस्कार से लौट रही बोलेरो और डंपर की टक्कर मे...

तेलंगाना की ‘लेडी अघोरी’ बनीं सबसे युवा महामंडलेश्वर! 18 भाषाओं का ज्ञान और सालों की तंत्र साधना; जानें कौन हैं ये रहस्यमयी सन्यासिनी?

उज्जैन: सिंहस्थ को भले अभी लंबा समय है, लेकिन उससे पहले एक ऐसी किन्नर अघोरी की कहानी आपको बताते हैं. जिसको लेकर दावा किया जाता है कि वह सबसे कम उम्र में महामंडलेश्वर नियुक्त की गई. जो एक नहीं अंग्रेजी सहित 18 भाषाओं की ज्ञानी है. देश-दुनिया में भ्रमण करती है, जिसका कार और शमशान ही निवास स्थान है. उन्होंने सालों की तपस्या से तंत्र साधना सीखी. बचपन में ही घर छोड़कर सन्यास का जीवन चुना. समाज के तानो-बानो के बीच आज खुद को एक खास पहचान दी. उनका नाम नंदगिरी किन्नर महामंडलेश्वर है, जो तेलंगाना की निवासी हैं और किन्नर अखाड़े की एक प्रमुख लेडी अघोरी महामंडलेश्वर हैं.

सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर मां काली नंद गिरी

उज्जैन के चक्रतीर्थ शमशान में तंत्र साधना के दौरान किन्नर दिगंबर अघोरी माता से ETV भारत ने चर्चा की. जहां उन्होंने अपना नाम श्री श्री 1008 मां काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता बताया. उनकी उम्र 27 है और वह तेलंगाना के मंचरियाल जिले की रहने वाली हैं. दिंगबर अघोरी माता ने कहा मैं किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे इस काबिल चुना और मैं सबसे कम उम्र की तेलंगाना राज्य से देश की पहली किन्नर महामंडलेश्वर बन गई.

कैसे जुड़ी किन्नर अखाड़े से

दिगंबर अघोरी माता ने बताया “लगभग 18 वर्षों की मेरी तपस्या का ये परिणाम है. मैंने 6 साल तंत्र साधना सीखी और 12 साल काशी में रही, जहां एक महाराज मिले उन्होंने किन्नर अखाड़े की सती नंद गिरी माता से मिलवाया. चूंकि में शुरू से ही धर्म कर्म के कामों से जुड़ी रही. मैंने तेलंगाना में मंदिर का एक मुद्दा सुलझाने में अपना 100% दिया. मेरे धर्म के ऐसे कई कामों को देख सती नंद गिरी माता के आशीर्वाद से अंतराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मिलना हुआ और मैं किन्नर अखाड़े से जुड़ गई. आज दोनों की वजह से सबसे कम उम्र में ही महामंडलेश्वर भी नियुक्त हो गई. जिसकी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती.

6 साल तक सीखी तंत्र साधना

उन्होंने बताया भले में तेलंगाना से हूं लेकिन उज्जैन से मेरा गहरा नाता है. अपने से जुड़े सभी भक्तों को में उज्जैन से ही लीड करती हूं. मैंने बचपन में ही माता-पिता को छोड़ सन्यास का जीवन चुन लिया था. आज भी माता-पिता से चर्चा होती है, तो कहते है बेटा जहां रहो खुश रहो. मैंने जब उनको छोड़ा, तब अघोरियों से प्रेरित थी. नग्न अवस्था में घूमती लाली-लिपस्टिक मेकअप लगाती, तो लोग अपशब्द कहते थे और मजाक उड़ाते थे. समाज के तानों से तंग आकर मां कामख्या के धाम असम पहुंची, तो वहां मुझे शिक्षक के रूप में गुरु मिले. जिन्होंने 6 साल मुझे तंत्र साधना सिखाई.

तंत्र क्रिया करना आसान काम नहीं है, प्राण त्यागने तक की नौबत आ जाती है. मैंने कभी पलट कर नहीं देखा. सीखने की ललक ने मुझे उपाधि दी. आज 18 साल हो गए, मैं देश दुनिया में भ्रमण करती हूं मेरा निवास अभी तक शमशान और मेरी कार ही रही है. मेरा कोई आश्रम नहीं है, लेकिन अब महामंडलेश्वर बनने के बाद उज्जैन में आश्रम बनाने का मैंने निर्णय लिया है.

18 भाषाओं का ज्ञान

महामंडलेश्वर ने बताया वह कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन देश-दुनिया में भ्रमण के दौरान उन्हें अंग्रेजी भाषा सहित 18 भाषाओं का ज्ञान हो गया. जैसे हिंदी, कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, असमिया, मराठी व अन्य.

सोशल मीडिया पर लाखों भक्त, गूगल पर ट्रेंड

वो दुनिया की पहली किन्नर अघोरी लेडी कहलाती है. जब भी आप इंटरनेट के सर्च इंजन गूगल व अन्य पर THE WORLD FIRST LADY KINNER दिगम्बर अघोरी माता सर्च करेंगे, तो मेरी ही तस्वीर पाएंगे. मैं हर रोज सोशल मीडिया पर एक वीडियो तंत्र साधना से जुड़ा व अन्य अपलोड करती हूं. जिस पर मुझे एक वीडियो में ही लाखों व्यूज मिलते हैं. मेरे सोशल मीडिया पर दो एकाउंट है. दोनों पर कुल 6 मिलियन फॉलोवर्स है. मेरे भक्त सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया भर में है.

सिद्ध की हुई 70 खोपड़ी वाली कार

उनके पास दो कार है. दोनों ही कार में मां काली का बड़ा सा चित्र, नर मुंड के चित्र, आगे त्रिशूल लगा हुआ है. वही एक कार के अंदर लगभग 70 मृत मानवों की सिद्ध की हुई खोपड़ियां हैं, जो शक्ति के रूप में मेरे साथ रहती है. जब भी कोई तंत्र साधना करती हूं तो एक खोपड़ी सिद्ध की हुई रखना होती है. दूसरी जो कार है उसमें 2 खोपड़ियां हैं. जब उनसे पूछा कि क्या लोगों को आपके इस अंदाज से डर नहीं लगता, तो उन्होंने कहा कि ये लोगों को डराने के लिए नहीं, यह हमारी पहचान है. तंत्र साधना किसी का बुरा करने के लिए हम कभी नहीं करते.

अघोरी होने के बावजूद मर्यादा का रखती हैं ख्याल

महामंडलेश्वर दिगंबर अघोरी माता वैसे तो नग्न अवस्था में ही रहती हैं, क्योंकि वह अघोरी है, लेकिन जब समाज के बीच होती हैं, तो शेर की खाल की डिजाइन का कपड़ा पहनती हैं, 108 रुद्राक्ष की माला व मुंड माला गले में होती है, ज्यादातर काला कपड़ा ओढ़ कर रखती हैं.

कैसे बनी महामंडलेश्वर?

शुक्रवार 13 मार्च को महाकाल की नगरी अवंतिका उज्जैनी में इंटरनेशनल किन्नर अखाडे का खास कार्यक्रम शहर के निजी गार्डन में आयोजित हुआ. ये कार्यक्रम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ वर्ष 2028 को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया. बैठक में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की मौजूदगी में देश भर के किन्नर पदाधिकारी और उनके चेले मौजूद हुए. आयोजन में 4 महामंडलेश्वर और 7 महंतो की नियुक्तिया की गई.

अलग-अलग राज्यों से आए किन्नर संतों का महामंडलेश्वर व श्रीमंत की उपाधि देकर उनका पट्टाभिषेक किया गया. चांदी के शिव का दुग्ध अभिषेक व केसरिया साल एवं पुष्प वर्षा के साथ वैदिक मंत्र के बीच यह विधि संपन्न की गई. उसी में से काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता को सबसे कम उम्र में महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया. जिसके बाद उनके नाम के आगे श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर लगा.