Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ... दिल्ली में पूरा हुआ 100 'अटल कैंटीन' का संकल्प: DU मेट्रो स्टेशन से 25 नई कैंटीन शुरू, मात्र ₹5 में ... रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ... खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ रांची में राजद-वाम दलों का साझा मोर्चा: आर्थिक नाकेबंदी और दिल्ली घेराव...

 कनाडा की क्यूबेक के लिए नई इमिग्रेशन नीति

विदेशी पेशेवरों के लिए सरकार का फैसला बड़ी राहत

ओटावाः कनाडा सरकार ने अपनी आप्रवासन नीतियों में एक बड़ा बदलाव करते हुए क्यूबेक प्रांत में काम कर रहे विदेशी कुशल श्रमिकों के लिए नई रियायतों की घोषणा की है। इस नई नीति के तहत, जिन श्रमिकों के पास वर्तमान में वर्क परमिट है और जो स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं, उन्हें 12 महीने का अतिरिक्त ओपन वर्क परमिट विस्तार दिया जाएगा। यह कदम विशेष रूप से उन पेशेवरों को ध्यान में रखकर उठाया गया है जो प्रशासनिक देरी या बैकलॉग के कारण अपने कानूनी दर्जे को लेकर चिंतित थे।

क्यूबेक, अपनी विशिष्ट भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के कारण, अपनी इमिग्रेशन नीतियों को संघीय सरकार के साथ मिलकर स्वतंत्र रूप से संचालित करता है। हाल के महीनों में, प्रांत के तकनीकी, स्वास्थ्य और निर्माण क्षेत्रों में श्रम की भारी कमी देखी गई है। सरकार का मानना है कि इस विस्तार से न केवल वर्तमान वर्कफोर्स को स्थिरता मिलेगी, बल्कि इससे कनाडा की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अप्रवासियों के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि अब उन्हें अपना परमिट समाप्त होने के डर के बिना काम करना जारी रखने और अपने परिवार के साथ रहने का मौका मिलेगा।

आलोचकों का कहना है कि जहाँ यह कदम स्वागत योग्य है, वहीं सरकार को पीआर आवेदनों के प्रसंस्करण समय में भी सुधार करना चाहिए। हालांकि, इमिग्रेशन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह 12 महीने की अवधि एक ब्रिजिंग समाधान के रूप में कार्य करेगी, जिससे आवेदकों को अपने सभी दस्तावेजों को अंतिम रूप देने का पर्याप्त समय मिलेगा। नई नीति से उन हजारों भारतीय पेशेवरों को भी लाभ होने की उम्मीद है जो मोंट्रियल और आसपास के शहरों में आईटी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कार्यरत हैं। कनाडा का यह लचीला रुख उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाए रखने में मदद करेगा।