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चीन ने अरुणाचल सीमा पर बसा लिए 450 गांव

चुनौतियों के बाद भी म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम जारी

  • भारत के चिकन नेक पर सीधी नजर

  • अरुणाचल की सीमा पर जियाओकांग गांव

  • सीएम ने पहले साइंस सिटी का उदघाटन किया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः अरुणाचल प्रदेश से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की बढ़ती सक्रियता ने भारत के लिए नई रणनीतिक चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने असम राइफल्स के एक सेमिनार में खुलासा किया कि चीन ने सीमा के पास लगभग 628 जियाओकांग या खुशहाल गांव बसाए हैं। इनमें से 450 गांव पूर्वोत्तर सीमाओं पर स्थित हैं, जिनमें अकेले 90 फीसद अरुणाचल प्रदेश के पार हैं। ये बस्तियां केवल नागरिक निवास नहीं हैं, बल्कि सैन्य उद्देश्यों के लिए दोहरे उपयोग वाली संरचनाएं हैं, जो विवादित क्षेत्रों में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की संवेदनशीलता पर भी विशेष जोर दिया गया। तिब्बत की चुम्बी घाटी के निकट स्थित यह 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ता है। बांग्लादेश के साथ मौजूदा कूटनीतिक अनिश्चितता ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इसके जवाब में भारत यहाँ बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है, जिसमें रेल संपर्क के लिए 24 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण शामिल है, जिसे भविष्य में 62 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा।

चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारत ने अपनी रणनीतिक परियोजनाओं की गति तेज कर दी है। अरुणाचल की सेला सुरंग, ब्रह्मपुत्र और लोहित नदियों पर बने पुल, और असम का बोगीबील रेल-सड़क पुल न केवल क्षेत्रीय विकास का हिस्सा हैं, बल्कि युद्ध की स्थिति में सेना की त्वरित तैनाती और रसद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, म्यांमार सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बाड़ लगाने का कार्य भी प्रगति पर है।

सुरक्षा चुनौतियों के बीच, असम में बौद्धिक और वैज्ञानिक विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के सोनापुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी राज्य की पहली साइंस सिटी का उद्घाटन किया। 82 एकड़ में फैली यह सुविधा कोलकाता की साइंस सिटी से भी बड़ी बताई जा रही है। साथ ही, राज्य के पांच अन्य जिलों में जिला विज्ञान केंद्रों का भी शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और नवाचार की अगली पीढ़ी को प्रेरित करना है।