दुनिया पर ‘डिजिटल युद्ध’ का खतरा! ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच महा-साइबर अटैक; इंटरनेट ठप, कई मोबाइल ऐप्स ने काम करना बंद किया
ईरान-अमेरिका-इजराइल को शुरू हुए 10 दिनों से भी ज्यादा का समय हो चुका है. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान-अमेरिका-इज़रायल युद्ध में अब साइबर वॉर भी बड़ा मोर्चा बन गया है. मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ-साथ अब डिजिटल नेटवर्क और इंटरनेट सिस्टम भी निशाने पर हैं. युद्ध धीमा पड़ने बजाय हर रोज तेज होता जा रहा है.
युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े साइबर ऑपरेशन चलाए. कई इलाकों में ईरान की इंटरनेट कनेक्टिविटी घटकर लगभग 4% तक रह गई है. फाइबर ऑप्टिक केबल को नुकसान और साइबर हमलों से कम्युनिकेशन व सेंसर नेटवर्क प्रभावित हुए हैं.
ईरान की कई सरकारी वेबसाइट और न्यूज़ पोर्टल अस्थायी रूप से हैक या बाधित हुए. तेहरान के ट्रैफिक कैमरा और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी डिजिटल गतिविधियों को भी निशाना बनाया गया. अमेरिका और ईरान दोनों की तरफ से ही इस तरह के हमले लगातार जारी हैं.
मोबाइल ऐप के जरिए मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन
ईरान में लोकप्रिय प्रेयर टाइम ऐप BadeSaba को हैक करने का दावा भी किया गया है. ऐप यूज़र्स को सरकार विरोधी संदेश भेजे गए हैं. इसे साइकोलॉजिकल ऑपरेशन (PSYOPS) का हिस्सा माना जा रहा है. ऐसा करने के पीछे की वजह दुश्मन को कमजोर करना है, ताकि वह खुद ही युद्ध से पीछे हट जाए.
ईरान ने भी किया पलटवार
ईरान से जुड़े 60 से ज्यादा हैकर और हैक्टिविस्ट समूह सक्रिय है. कई देशों के सरकारी और निजी संगठनों पर साइबर हमलों का दावा किया गया है. हमलों में शामिल DDoS अटैक वेबसाइट डिफेसमेंट डेटा चोरी और डेटा लीक नेटवर्क में मैलवेयर या वाइपर हमला है.
अमेरिकी कंपनी पर बड़े हमले का दावा
11 मार्च 2026 को अमेरिकी मेडिकल टेक कंपनी Stryker Corporation पर साइबर हमले का दावा किया है. करीब 50 टेराबाइट डेटा चोरी होने की अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है ऊर्जा, बैंकिंग, हेल्थकेयर और रक्षा क्षेत्र पर साइबर हमलों का खतरा बताया गया. महत्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाई गई.
हाइब्रिड वॉर का नया दौर
यह युद्ध अब हाइब्रिड वॉर बन चुका है. इसमें मिसाइल हमले + साइबर अटैक + मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन शामिल हैं. आने वाले समय में साइबर हमलों का खतरा और बढ़ सकता है. दोनों ही देशों की तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं. हालांकि अब तक युद्ध को रोकने को लेकर किसी भी तरफ से पहल नहीं की गई है.