छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘भीष्म पितामह’ का निधन! पूर्व DGP और प्रखर कवि विश्वरंजन ने पटना में ली अंतिम सांस; रमन सिंह बोले- ‘अपूरणीय क्षति’
रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन का शनिवार रात निधन हो गया. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और पटना के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज जारी था. उनके निधन की खबर मिलते ही छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासनिक महकमे में शोक की लहर दौड़ गई.
पटना के अस्पताल में ली अंतिम सांस
जानकारी के अनुसार पिछले महीने उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें पटना स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि उन्हें हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या थी. इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही और शनिवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली.
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जताया शोक
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व डीजीपी विश्वरंजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि 1973 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने वर्ष 2007 में डीजीपी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अत्यंत कुशलता, निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ किया. उनका प्रशासनिक अनुभव, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता सदैव स्मरणीय रहेंगे. उन्होंने प्रभु श्रीराम से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है.
पुलिस लाइन में दी गई श्रद्धांजलि
राजधानी रायपुर के पुलिस लाइन में पूर्व डीजीपी विश्वरंजन के निधन पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. इस दौरान प्रदेशभर से रिटायर्ड डीजीपी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित हुए. सभी ने उनके योगदान और ऐतिहासिक कार्यों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी और उनके परिजन भी मौजूद रहे.
श्रद्धांजलि सभा में जुटे वरिष्ठ अधिकारी
श्रद्धांजलि सभा में रिटायर्ड डीजीपी एसके पासवान, जीएस माथुर, गिरधारी नायक, जीएस बामरा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए. अधिकारियों ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने साहस और सूझबूझ के साथ काम किया. कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
2007 में संभाली थी डीजीपी की जिम्मेदारी
विश्वरंजन वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ के डीजीपी बनाए गए थे. तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी. उन्होंने लगभग चार वर्षों तक इस पद पर रहते हुए पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की. 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे विश्वरंजन का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा. मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था.
इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी निभाई अहम भूमिका
डीजीपी बनने से पहले विश्वरंजन लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में प्रतिनियुक्ति पर रहे. वहां उन्होंने अतिरिक्त निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं. प्रशासनिक दक्षता और अनुभव के लिए उन्हें पुलिस महकमे में खास तौर पर याद किया जाता है. उनके निधन पर पुलिस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है.