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भारत की राजधानी दिल्ली में मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में एक अहम ग्लोबल स्ट्रेटेजिक कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है, जिसमें देश और दुनिया के बड़े नीति निर्माता, सैन्य अधिकारी, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और उद्योग जगत के नेता शामिल होंगे. सिनर्जिया कॉन्क्लेव 2026, 11 से 13 मार्च के बीच आयोजित होगा. इसका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और वैश्विक रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर रहेगा. आयोजन का उद्देश्य सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण और भविष्य की रणनीति को दिशा देना है.

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब दुनिया तेजी से बदल रही है. टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि नीतियां और नियम उससे पीछे रह जाते हैं. ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और साइबर खतरों जैसे मुद्दे अब पहले से ज्यादा जटिल हो चुके हैं.

दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और देशों के बीच आर्थिक व तकनीकी प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है. ऐसे में यह सम्मेलन नीति निर्माताओं को एक साझा मंच देता है, जहां वे इन चुनौतियों को समझकर आगे की रणनीति तय कर सकें.

टेक्नोलॉजी की रफ्तार बहुत तेज

सिनर्जिया फाउंडेशन के फाउंडर और प्रेसिडेंट टोबी सिमोन ने कॉन्क्लेव को लेकर बताया, हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहां टेक्नोलॉजी और बदलाव की रफ्तार बहुत तेज हो गई है. एआई, एनर्जी ट्रांजिशन और जियो-इकोनॉमिक बदलाव, संस्थानों की क्षमता से भी तेज आगे बढ़ रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, रणनीतिक बढ़त केवल भविष्य की भविष्यवाणी से नहीं मिलेगी, बल्कि मजबूत और भरोसेमंद सिस्टम तैयार करने से मिलेगी। सिनर्जिया कॉन्क्लेव का मकसद चर्चा से आगे बढ़कर एक्शन पर फोकस करना है.

इस कॉन्क्लेव का आयोजन सिनर्जिया फाउंडेशन कर रही है, जो बेंगलुरु स्थित एक स्ट्रेटेजिक थिंक टैंक है. यह संस्था सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और वैश्विक नीति से जुड़े मुद्दों पर काम करती है और सरकार, उद्योग और विशेषज्ञों के साथ मिलकर रणनीतिक समाधान तैयार करती है.

सेना के सीनियर अधिकारी होंगे शामिल

इस बार इस कॉन्क्लेव में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह भी हिस्सा लेंगे. उनके साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद होंगे. पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन भी इसमें भाग ले रहे हैं.

इसके अलावा नीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञ मोंटेक सिंह आहलूवालिया भी इस मंच का हिस्सा हैं, जो पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके है. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम नामों में आलोक जोशी शामिल हैं, जो नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन और रॉ के पूर्व प्रमुख भी रह चुके हैं.

कई देशों के दिग्गजों की होगी मौजूदगी

कार्यक्रम कई देशों के बड़े नाम भी शामिल हो रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी मेजर जनरल क्रिस स्मिथ, अमेरिका के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर लेफ्टिनेंट जनरल माइकल फ्लिन, श्रीलंका के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल शवेंद्र सिल्वा, इजराइल की स्पेशल फोर्स यूनिट सायेरेट मतकल के पूर्व कमांडर और केनेसट के सदस्य भी इस मंच का हिस्सा होंगे.

वहीं, इस कॉन्क्लेव के लिए नई दिल्ली को चुना जाना भी एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है. राजधानी में ही देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और प्रशासन से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं. यहां सम्मेलन आयोजित करने से अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर फैसलों को तेजी से लागू करने की दिशा में काम हो सकेगा.

सिनर्जिया फाउंडेशन ने क्या कहा?

सिनर्जिया फाउंडेशन के चीफ स्ट्रेटेजिक ऑफिसर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जीए वी रेड्डी ने बताया कि यह सम्मेलन तीन दिनों तक चलेगा और हर दिन का अलग फोकस तय किया गया है. पहले दिन वैश्विक हालात को समझने और एक साझा तस्वीर बनाने पर जोर रहेगा. दूसरे दिन अनिश्चितताओं को अवसर में बदलने पर चर्चा होगी, जबकि तीसरे दिन ठोस रणनीति और ढांचा तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा.

इस तरह यह कार्यक्रम सिर्फ विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठोस नीतिगत दिशा देने की कोशिश करेगा.

सिनर्जिया फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक ऑफिसर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मिन्हास के मुताबिक, दिल्ली में इस कॉन्क्लेव का आयोजन पहली बार किया जा रहा है, क्योंकि यहां राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीति और कूटनीति से जुड़े फैसले एक साथ जुड़ते हैं. उन्होंने कहा, दिल्ली वह जगह है जहां नीतियां बनती हैं और उन्हें लागू किया जाता है. ऐसे में यहां इस तरह का कॉन्क्लेव होना इसे और प्रभावी बनाता है.

कई विषयों पर होगी चर्चा

कॉन्क्लेव में कई बड़े रणनीतिक विषयों पर चर्चा होगी. इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे शामिल हैं. इसके अलावा भविष्य की टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और राष्ट्रीय शक्ति के नए स्वरूप पर भी बात की जाएगी. इन विषयों को आपस में जोड़कर देखा जाएगा, ताकि एक समग्र रणनीति तैयार की जा सके.

इस कॉन्क्लेव की एक खास बात यह है कि यहां केवल बातचीत नहीं होगी, बल्कि समाधान पर भी जोर रहेगा. अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर ऐसे मॉडल और रास्ते तैयार करेंगे, जिन्हें आगे लागू किया जा सके. इसमें क्रॉस-डोमेन स्ट्रेस टेस्टिंग, अर्ली वार्निंग सिस्टम, और पॉलिसी फ्रेमवर्क जैसे मुद्दों पर भी काम होगा, ताकि भविष्य के संकटों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.

इस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई अहम रिपोर्ट्स भी जारी की जाएंगी. इनमें ग्लोबल फ्यूचर्स 2035, इंडियाज सिक्योरिटी फ्रॉम सीबेड टू स्पेस, क्वांटम अनलॉक्ड, कोविड कम्पेंडियम और 6जी स्ट्रेटेजिक फ्रंटियर जैसी रिपोर्ट्स शामिल हैं. इन रिपोर्ट्स में भविष्य की टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय सुरक्षा, और वैश्विक रणनीति से जुड़े मुद्दों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जो आने वाले समय में नीति निर्माण में मदद कर सकते हैं.