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अनिल अंबानी ने चीनी बैंकों से कर्ज लिया

ईडी की जांच जारी रहने के बीच ही नया राज सामने आया

  • भारतीय बैंकों का कर्ज अलग से है

  • तीन चीनी संस्थाओं से मिला कर्ज

  • किसी की भी अदायगी नहीं हुई है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय की जांच में उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों और तीन प्रमुख चीनी सरकारी बैंकों के बीच हुए भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, अनिल अंबानी के रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं को इन चीनी बैंकों से कुल 13,558 करोड़ रुपये का कर्ज मिला था, जो अब तक बकाया है।

दस्तावेजों की समीक्षा से पता चलता है कि सबसे बड़ा ऋण चाइना डेवलपमेंट बैंक द्वारा दिया गया था, जिसने रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं को लगभग 9,134 करोड़ का कर्ज दिया। इसके अलावा, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना ने 3,048 करोड़ और इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना ने लगभग 1,374 करोड़ की फंडिंग प्रदान की थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन तीनों चीनी बैंकों से मिलने वाला कर्ज अनिल अंबानी की व्यक्तिगत गारंटी पर आधारित था।

डिफ़ॉल्ट और चेतावनी की अनदेखी आंतरिक दस्तावेजों और 2017 के पत्रों से पुष्टि होती है कि आईसीबीसी ने करीब एक दशक पहले ही 7,932 करोड़ रुपये के डिफ़ॉल्ट की चेतावनी दी थी। अगस्त और अक्टूबर 2017 के औपचारिक नोटिसों के बावजूद, अनिल अंबानी ने कथित तौर पर ऋणदाताओं की कम से कम पांच चेतावनियों को नजरअंदाज किया।

यह तथ्य अब उनके धोखाधड़ी या डिफ़ॉल्ट के बचाव को कमजोर करता है, क्योंकि यह साबित करता है कि दिवाला कार्यवाही शुरू होने से बहुत पहले ही उनकी व्यक्तिगत देनदारी स्थापित हो चुकी थी। इसके साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस को दिए गए 2,929 करोड़ के ऋण में भी अंबानी की व्यक्तिगत गारंटी शामिल थी, जिससे उनके निजी एसेट्स सीधे तौर पर रिकवरी के दायरे में आ गए हैं।

प्रवर्तन निदेशालय वर्तमान में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है। रिलायंस कम्युनिकेशंस पर एक समय 1.7 लाख करोड़ रुपये का कुल कर्ज था। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या उधार ली गई धनराशि को समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया या जटिल वित्तीय संरचनाओं के माध्यम से इसकी लेयरिंग की गई। यह पूरी जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत की जा रही है।

हालिया कार्रवाई में, एजेंसी ने जांच के विभिन्न चरणों में 15,000 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इसमें मुंबई स्थित उनका आवास एबोड और अन्य कॉर्पोरेट संपत्तियां शामिल हैं। समूह की संस्थाओं और पूर्व अधिकारियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया है, जिसमें वित्तीय रिकॉर्ड और बोर्ड-स्तरीय अनुमोदनों को साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।