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स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथि ज्ञानी रघबीर सिंह को हटाया गया

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की आपात बैठक में फैसला

  • विशेष बैठक समिति मुख्यालय में हुई

  • अकाली दल के खिलाफ राय दी थी

  • खुद ग्रंथी इस फैसले से हैरान नहीं

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की कार्यकारी समिति ने गुरुवार को अपने मुख्यालय में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथि और अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को तत्काल प्रभाव से जबरन सेवानिवृत्ति दे दी है। इस बैठक की अध्यक्षता एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने की।

यह कार्रवाई तब की गई जब ज्ञानी रघबीर सिंह 18 फरवरी को जालंधर में मीडिया के समक्ष लगाए गए अपने उन आरोपों के समर्थन में कोई लिखित साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहे, जिनमें उन्होंने एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। अध्यक्ष धामी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह पर कई गंभीर आरोप थे और कार्यकारी समिति ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही यह कठोर कदम उठाया है।

इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि उन्हें इस फैसले पर कोई हैरानी नहीं है क्योंकि वे इसकी उम्मीद पहले से ही कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके और एसजीपीसी के बीच टकराव की नींव तब पड़ी थी, जब उन्होंने 22 दिसंबर, 2024 को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। सिंह ने बताया कि उन्होंने 2007 से 2017 के बीच अकाली दल के शासनकाल के दौरान धार्मिक कदाचार के लिए सुखबीर बादल, पूर्व अकाली मंत्रियों और पार्टी की कोर कमेटी के सदस्यों को तनखाह (धार्मिक दंड) सुनाई थी।

गौरतलब है कि एसजीपीसी ने 19 फरवरी को ज्ञानी रघबीर सिंह को अल्टीमेटम दिया था, जो उनके द्वारा एसजीपीसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने और भूमि सौदों में पारदर्शिता पर सवाल उठाने के एक दिन बाद जारी किया गया था। इसके जवाब में सिंह ने 22 फरवरी को एक जवाबी अल्टीमेटम जारी करते हुए एसजीपीसी से उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब मांगा था। यह विवाद अब उनकी सेवानिवृत्ति के साथ एक नए मोड़ पर पहुँच गया है।