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कनाडा की क्यूबा को मदद की पहल

अमेरिका से कूटनीतिक दूरी बढ़ने के बाद नई पहल

हवानाः एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में, कनाडा ने सोमवार को घोषणा की है कि वह क्यूबा को मानवीय और आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक विस्तृत योजना पर काम कर रहा है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब क्यूबा ईंधन की भारी किल्लत और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण वाशिंगटन द्वारा तेल आपूर्ति को रोकने के लिए लगाए गए कड़े प्रतिबंध हैं।

कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार क्यूबा की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि उन्होंने सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से अभी इस योजना के विशिष्ट विवरण साझा नहीं किए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि क्यूबा की ऊर्जा जरूरतों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वहां एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर पलायन और भुखमरी की स्थिति बन सकती है।

वाशिंगटन और हवाना के बीच तनाव हाल के हफ्तों में चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने क्यूबा की ओर जाने वाले तेल के सभी रास्तों को ब्लॉक करने की आक्रामक नीति अपनाई है। इसमें क्यूबा के पुराने सहयोगी वेनेजुएला से आने वाली तेल आपूर्ति भी शामिल है।

इस घेराबंदी के कारण क्यूबा में भोजन और परिवहन की कीमतें आसमान छू रही हैं और देश के अधिकांश हिस्सों में घंटों बिजली गुल (ब्लैकआउट) रहती है। दरअसल, जनवरी 2026 में वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रम्प प्रशासन का हौसला बढ़ा हुआ है और वे अब क्यूबा के नेतृत्व पर दबाव बनाकर वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिशों में जुटे हैं। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि क्यूबा जल्द ही विफल होने वाला है, जो उनके सख्त रुख को दर्शाता है।

दूसरी ओर, कनाडा और अमेरिका के बीच भी व्यापार शुल्क (टैरिफ) और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर दूरियां बढ़ी हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में मिडल पावर्स (मध्यम शक्तियों) को एकजुट होने का आह्वान किया था ताकि वे अमेरिका जैसे देशों के वर्चस्व और एकतरफा फैसलों का शिकार होने से बच सकें।

कनाडा की यह सहायता पहल केवल मानवीय आधार पर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र विदेश नीति के प्रदर्शन के रूप में भी देखी जा रही है। मानवाधिकार विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने ट्रम्प की इस नीति की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और साम्राज्यवादी दृष्टिकोण बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा का यह कदम उत्तरी अमेरिका के भीतर एक नए भू-राजनीतिक समीकरण को जन्म दे सकता है, जहाँ ओटावा अपने पड़ोसी अमेरिका की इच्छा के विरुद्ध जाकर क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।