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यह बैक्टीरिया कैसर ट्यूमर को अंदर से खा लेगा

वाटरलू विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों की परीक्षण सफल

  • अंदर जाने के बाद काम शुरु करता है

  • इसमें जेनेटिक संशोधन किये गये हैं

  • प्री क्लीनिकल परीक्षण अभी बाकी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वाटरलू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कैंसर के उपचार में एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। उन्होंने विशेष रूप से इंजीनियर किए गए बैक्टीरिया का उपयोग करके ट्यूमर को अंदर से नष्ट करने की पद्धति पर काम शुरू किया है। यह नई रणनीति उन सूक्ष्मजीवों पर आधारित है जो स्वाभाविक रूप से ऑक्सीजन-रहित वातावरण में पनपते हैं, जो इसे कई ठोस ट्यूमर के आंतरिक भाग को लक्षित करने के लिए एक आदर्श माध्यम बनाती है।

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वॉटरलू में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ मार्क ऑकोइन के अनुसार, बैक्टीरिया के बीजाणु ट्यूमर में प्रवेश करते हैं। ट्यूमर का आंतरिक भाग मृत कोशिकाओं से बना होता है और इसमें ऑक्सीजन की कमी होती है, जो क्लोस्ट्रीडियम स्पोरोजेन्स नामक मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के लिए अनुकूल स्थिति प्रदान करता है। ये बैक्टीरिया ट्यूमर के पोषक तत्वों का उपभोग करते हैं और वहां अपनी संख्या बढ़ाकर ट्यूमर को समाप्त करने का कार्य करते हैं।

ऑक्सीजन की बाधा को पार करना वैज्ञानिकों के सामने मुख्य चुनौती यह थी कि ट्यूमर के बाहरी हिस्सों में थोड़ी ऑक्सीजन होने के कारण ये बैक्टीरिया पूरी तरह ट्यूमर खत्म करने से पहले ही मर जाते थे। इस समस्या के समाधान के लिए, शोधकर्ताओं ने एक संबंधित बैक्टीरिया से ऐसा जीन डाला जो ऑक्सीजन के प्रति अधिक सहनशील हो।

इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए उन्होंने कोरम सेंसिंग नामक एक प्राकृतिक संचार प्रक्रिया का उपयोग किया। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि ऑक्सीजन-प्रतिरोधी जीन केवल तभी सक्रिय हो, जब ट्यूमर के अंदर पर्याप्त संख्या में बैक्टीरिया जमा हो जाएं। इससे बैक्टीरिया रक्तप्रवाह जैसे ऑक्सीजन-युक्त क्षेत्रों में अनियंत्रित रूप से नहीं फैलते हैं, जिससे यह उपचार सुरक्षित हो जाता है।

सिंथेटिक बायोलॉजी का कमाल एप्लाइड मैथमेटिक्स के प्रोफेसर डॉ. ब्रायन इंगल्स ने बताया कि उन्होंने सिंथेटिक बायोलॉजी का उपयोग करके डीएनए के टुकड़ों से एक इलेक्ट्रिक सर्किट जैसी प्रणाली विकसित की है। हर टुकड़ा एक विशिष्ट कार्य करता है, जो मिलकर एक पूर्वानुमानित प्रणाली बनाते हैं। शोध टीम ने पहले चरण में यह पुष्टि कर ली है कि यह सिस्टम सही समय पर सक्रिय होता है। अब अगला कदम ऑक्सीजन-सहनशीलता जीन और कोरम-सेंसिंग नियंत्रण प्रणाली को एक ही बैक्टीरिया में संयोजित कर प्री-क्लिनिकल परीक्षण करना है।

यह शोध इंजीनियरिंग, गणित और जीव विज्ञान के अंतःविषय सहयोग का परिणाम है। वॉटरलू विश्वविद्यालय की यह टीम क्रेम को लैब्स के साथ मिलकर इस तकनीक को भविष्य के चिकित्सा समाधान के रूप में विकसित कर रही है, जो कैंसर के उपचार में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

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