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प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार

अनिल विज की पुरानी फोटो शेयर कर दिया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद छेड़ दिया है। इस विरोध प्रदर्शन के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस पार्टी के बीच जुबानी जंग अब व्यक्तिगत और तीखी होती जा रही है। शुक्रवार को जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के बाहर शर्ट उतारकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह शर्टलेस विरोध प्रधानमंत्री और मुख्य विपक्षी दल के बीच मर्यादा की बहस बन जाएगा।

रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं की आलोचना करते हुए इसे गंदी और नंगी राजनीति करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने इस तरह का व्यवहार देश की छवि को धूमिल करता है और पूरे देश को शर्मसार करता है। भाजपा ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब दुनिया भारत की तकनीकी प्रगति पर चर्चा करने जुटी थी, तब कांग्रेस अपनी अमर्यादित हरकतों से भारत को दुनिया के सामने नीचा दिखा रही थी।

कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा के पुराने इतिहास को खंगाल डाला। भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने प्रधानमंत्री के बयानों का जवाब देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पुरानी और चर्चित तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में हरियाणा के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल विज एक विरोध रैली या सार्वजनिक सभा के दौरान बिना शर्ट के (अर्धनग्न) दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ मौजूद अन्य लोग भी इसी अवस्था में विरोध दर्ज करा रहे हैं।

श्रीनिवास बीवी ने फोटो के कैप्शन में तंज कसते हुए लिखा, अगर विरोध प्रदर्शन के लिए टी-शर्ट उतारना नग्नता कहलाता है, तो आप इसे क्या कहेंगे? कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा विरोध प्रदर्शन के अलग-अलग मानकों का उपयोग कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि जब उनकी अपनी पार्टी के नेता इस तरह का प्रदर्शन करते हैं, तो क्या वह पवित्र होता है और जब विपक्ष के युवा बेरोजगारी या जनहित के मुद्दों पर शर्ट उतारते हैं, तो वह अमर्यादित कैसे हो जाता है? फिलहाल, यह मुद्दा केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब विरोध की नैतिकता और राजनीतिक पाखंड की बहस में बदल गया है, जहाँ दोनों दल एक-दूसरे के इतिहास और आचरण पर सवाल उठा रहे हैं।