छत्तीसगढ़ की गेवरा माइंस रिकार्ड बनाने की ओर अग्रसर
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वैश्विक स्तर पर रचेगी कीर्तिमान
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भविष्य की योजनाएं और विविधीकरण
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सरकार के साथ सौर ऊर्जा पर भी काम
रायपुरः कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा संचालित गेवरा खदान अगले साल तक दुनिया की शीर्ष कोयला उत्पादक खदान बनने का गौरव हासिल करने वाली है। एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को घोषणा की कि यह खदान 63 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त कर अमेरिका की सबसे बड़ी खदानों को पीछे छोड़ देगी।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित गेवरा खदान वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है। वर्ष 1981 से संचालित यह खदान इस साल 56 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करेगी। विशेष बात यह है कि इस खदान को अपनी क्षमता बढ़ाकर 70 मिलियन टन प्रति वर्ष करने के लिए आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।
एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहान ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य साझा करते हुए कहा, अगले साल तक, अकेले गेवरा खदान 63 मिलियन टन उत्पादन करेगी और दुनिया की नंबर एक कोयला खदान बन जाएगी। वर्तमान में अमेरिका के व्योमिंग में स्थित ब्लैक थंडर माइंस 61-62 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया की सबसे बड़ी खदान है, जिसके बाद नॉर्थ एंटेलोप रोशेल खदान का नंबर आता है। सीएमडी ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार प्रमुख संसाधनों—भूमि, मशीनरी, जनशक्ति और ग्राहकों की मांग—की आवश्यकता होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी के पास ये सभी संसाधन उपलब्ध हैं और भारतीय रेलवे के सहयोग से कोयले की निकासी के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है।
एसईसीएल केवल कोयला उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी भविष्य के ऊर्जा विकल्पों की ओर भी कदम बढ़ा रही है। कंपनी एसईसीएल क्षेत्र में 700 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की योजना बना रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर पानी पर तैरते सोलर पैनल प्रोजेक्ट्स पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी ने एक गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की पहचान की है। साथ ही, दुर्लभ मृदा तत्वों को निकालने के लिए वैज्ञानिक एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है।
कंपनी अगले साल मार्च तक अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रख रही है। इस आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग परियोजनाओं के विस्तार और विविधीकरण में किया जाएगा। गेवरा एरिया के महाप्रबंधक अरुण कुमार त्यागी ने विश्वास जताया कि 2026-27 तक हम अमेरिकी खदानों को पछाड़कर वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर लेंगे। यह न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के लिए एक बड़ी औद्योगिक उपलब्धि होगी।