एचईसी की जमीन पर बनेगी संरचनाएं
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दोनों पक्षों को अपना अपना लाभ
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प्रारंभिक वार्ता सकारात्मक रही है
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राज्य में विकास की नई रफ्तार
रजत कुमार गुप्ता
रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन की खाली पड़ी अधिशेष भूमि को सशुल्क वापस लेने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। यह कदम न केवल राज्य के शहरी और औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि आर्थिक बदहाली की कगार पर खड़े एचईसी के लिए भी एक संजीवनी के समान होगा।
दिल्ली के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से संपर्क साधा है। शुरुआती दौर की बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के आसार नजर आ रहे हैं। इस चर्चा का मुख्य केंद्र एचईसी के पास उपलब्ध वह भूमि है, जिसका वर्तमान में औद्योगिक उपयोग नहीं हो रहा है।
वर्तमान में एचईसी अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। संस्थान के पास कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देने तक के संसाधन नहीं बचे हैं। इसके अलावा, वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो चुके सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अन्य बकाया राशि भी लंबित है। वित्तीय बोझ इतना अधिक है कि बिना किसी बड़े फंड बैकअप के इसका उबरना नामुमकिन लग रहा है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा जमीन का अधिग्रहण और उसके बदले किया जाने वाला भुगतान, एचईसी को अपनी देनदारियों से मुक्त होने और पुनरुद्धार की दिशा में बढ़ने का अवसर देगा।
राज्य सरकार की नजर एचईसी की लगभग 2000 एकड़ जमीन पर है, लेकिन इस योजना में सबसे बड़ी बाधा अतिक्रमण है। भूमि के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जे और कानूनी विवाद हैं, जिनमें उलझने से सरकार की विकास योजनाओं में देरी हो सकती है। हालांकि, सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि लगभग 600 एकड़ जमीन पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और विवाद रहित है।
सूत्रों का कहना है कि हेमंत सरकार फिलहाल इसी 600 एकड़ जमीन पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि बिना किसी कानूनी पचड़े के तत्काल काम शुरू किया जा सके। इस जमीन को हासिल करने के पीछे सरकार का उद्देश्य राज्य की राजधानी रांची के स्वरूप को बदलना है।
अधिगृहित की जाने वाली इस भूमि पर कई पूर्व निर्धारित परियोजनाओं का खाका तैयार किया जा रहा है। रांची स्मार्ट सिटी परियोजना को और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए इस भूमि का उपयोग होगा। राज्य में तकनीकी निवेश आकर्षित करने के लिए एक विशाल आईटी हब का निर्माण। सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए नए क्लस्टर विकसित करना। इस योजना के सफल होने से जहाँ झारखंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं एचईसी के हजारों परिवारों को उनके बकाया हक मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।