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आतंकी संगठन अल शबाब के खिलाफ अभियान जारी

सोमालिया का अमेरिका समर्थित निर्णायक अभियान

मोगादिशुः सोमालिया की संघीय सरकार ने अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी समूह अल-शबाब के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को नए सिरे से तेज कर दिया है। अमेरिका द्वारा समर्थित इस पूर्ण युद्ध का उद्देश्य सोमालिया के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों से आतंकवादियों का सफाया करना और उन इलाकों पर फिर से नियंत्रण स्थापित करना है जो दशकों से चरमपंथियों के कब्जे में थे। यह अभियान ऐसे समय में हो रहा है जब अफ्रीकी संघ के शांति रक्षक बल धीरे-धीरे सोमालिया से हट रहे हैं और देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब पूरी तरह सोमाली राष्ट्रीय सेना पर आ रही है।

इस अभियान को अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड का मजबूत समर्थन प्राप्त है। फरवरी 2026 में, अमेरिका ने सोमालिया के मध्य शेबेली क्षेत्र में कई हवाई हमले किए हैं, जिसमें मोगादिशु के उत्तर-पूर्व में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य अल-शबाब के बम बनाने वाले नेटवर्क, प्रशिक्षण केंद्रों और उनके नेतृत्व को नष्ट करना है। अमेरिकी ड्रोन तकनीक की मदद से अब सेना उन भूमिगत ठिकानों और आपूर्ति मार्गों की पहचान कर पा रही है जो पहले दुर्गम थे। 2025 से अब तक अमेरिका ने सोमालिया में 125 से अधिक सैन्य ऑपरेशन किए हैं, जिससे आतंकवादियों की परिचालन क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा है।

सोमाली राष्ट्रीय सेना और अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित विशेष बल दानब ने जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मुक्त कराया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, लोअर शेबेली के जिलिब मार्का और धनाने जैसे पुराने गढ़ अब सैन्य नियंत्रण में हैं। इसके अतिरिक्त, गैल्मुडुग और हीरान प्रांतों में भी सेना ने कई गांवों को आतंकवादियों के चंगुल से छुड़ाया है। सोमालिया के रक्षा राज्य मंत्री उमर अली आब्दी के अनुसार, इन अभियानों में केवल आतंकवादियों को मारना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मुक्त कराए गए क्षेत्रों में घरों का पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता पहुँचाना भी प्राथमिकता है ताकि अल-शबाब वहां दोबारा अपनी जड़ें न जमा सके।

इतनी सफलताओं के बावजूद, अल-शबाब अभी भी अफ्रीका के सबसे लचीले और खतरनाक समूहों में से एक बना हुआ है। समूह ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब सीधे सैन्य संघर्ष के बजाय आत्मघाती हमलों और आईईडी विस्फोटों पर ध्यान केंद्रित किया है। हाल ही में मोगादिशु में एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र पर हुआ हमला इसकी पहुँच को दर्शाता है। इसके अलावा, सोमालिया में होने वाले आगामी 2026 के चुनावों के कारण राजनीतिक अस्थिरता का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे सैन्य संसाधनों का ध्यान भटक सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोमालिया की सुरक्षा के लिए अगले कुछ महीने निर्णायक होंगे, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय शांति रक्षक बलों के जाने के बाद पूरी जिम्मेदारी सोमाली सेना के कंधों पर होगी।