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बिहार में फैमिली रजिस्टर मान्य है, तो बंगाल में क्यों नहीं?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है और साथ ही भाजपा को भी आड़े हाथों लिया है। नबन्ना में एक बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को तुगलकी करार दिया। उन्होंने सवाल किया, जो दस्तावेज बिहार में स्वीकार किए जाते हैं, उन्हें बंगाल में अमान्य क्यों कर दिया गया है?

भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि उन्हें मनोवैज्ञानिक समस्या है। भाजपा के कई लोगों को अपना इलाज कराना चाहिए। उन्होंने उत्तर बंगाल को विभाजित करने की कथित कोशिशों पर भी निशाना साधा।

ममता बनर्जी ने केंद्र की नीतियों और कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, बेटी बचाओ का पैसा कहाँ गया? अत्याचार अब अपनी सीमाएं लांघ चुका है। आप आम लोगों के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। अगर सीधी उंगली से घी नहीं निकलता, तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है। इस सरकार की उम्र अब बस एक-दो साल ही बची है। उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर आज भी जल रहा है और बंगाल को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।

पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, उनके साथ हमारे मतभेद थे, लेकिन अंत में सुलह हो गई थी। उन्हें उपराष्ट्रपति बनाया गया, लेकिन अंत में क्या हुआ? मैंने सुना है कि उन्हें तीन महीने तक वेस्टर्न कोर्ट में बंदी बनाकर रखा गया था। उन्होंने एनआईए और महिला आयोग की सक्रियता पर भी तंज कसा कि बंगाल में एक पटाखा फूटने पर भी ये एजेंसियां पहुंच जाती हैं, जबकि उन्नाव जैसी घटनाओं पर आंखें मूंद ली जाती हैं।

चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा, आप बदला लेना चाहते हैं तो मुझसे लीजिए, जनता से नहीं। अगर आप 420 वोल्ट हैं, तो मैं 440 वोल्ट हूँ। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा ईआरओ को सस्पेंड किए जाने पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या उनका अपराध जानने की कोशिश की गई?

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आयोग तुगलकी तरीके से काम कर रहा है और व्हाट्सएप के जरिए निर्देश दे रहा है। उन्होंने सवाल किया, क्या जनता सरकार चुनती है या तुगलकी कमीशन किसी पार्टी के लिए वोट करवाता है? बिहार में जो 11 दस्तावेज मान्य थे, उन्हें यहाँ क्यों नहीं लागू किया गया? बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि यदि उनके अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रहार हुआ, तो वह इसका प्रत्याघात करेंगी और वैश्विक स्तर पर इसका प्रचार करेंगी।