पार्टी के छह विधायकों ने अचानक पार्टी छोड़ दी
-
हिमंता का दावा और लोग पार्टी छोड़ेंगे
-
राहुल गांधी को विफल वंशवादी बताया
-
कांग्रेस के विरोध के बीच बजट सत्र शुरु
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः असम की राजनीति में इस समय बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य में कांग्रेस पार्टी गहरे संकट से गुजर रही है, जहाँ एक ओर पार्टी के दिग्गज नेता साथ छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधानसभा का बजट सत्र हंगामे के साथ शुरू हुआ है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद कांग्रेस को एक साथ कई झटके लगे हैं। विधायक अब्दुर रशीद मंडल, शेरमन अली, बशांत दास, कमलसखा डे पुरकायस्थ, सिद्दीकी अहमद और शशीकांत दास ने पार्टी से किनारा कर लिया है। इस स्थिति पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया कि कांग्रेस अब असमिया लोगों और हिंदुओं के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने भविष्यवाणी की कि लोकसभा सांसद प्रद्युत बोर्दोलोई चुनाव से पहले पार्टी छोड़ देंगे और विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा में शामिल होंगे। सरमा ने यहाँ तक कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से सैकिया की माताजी से बात कर उन्हें भाजपा में लाएंगे। उन्होंने कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष के लिए नेतृत्व की विफलता और जमीनी कार्यकर्ताओं से उनके कटाव को जिम्मेदार ठहराया।
इन राजनीतिक हलचलों के बीच असम विधानसभा का चार दिवसीय बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हुआ। यह वर्तमान विधानसभा कार्यकाल का अंतिम सत्र है। सत्र के पहले दिन विपक्ष ने दिवंगत गायक जुबिन गर्ग की मृत्यु के मामले में त्वरित न्यायिक जांच की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने स्पष्ट किया कि परिवार न्याय चाहता है और इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
सत्र के एजेंडे के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दूसरे दिन वित्त मंत्री ‘वोट ऑन अकाउंट’ (अंतरिम बजट) पेश करेंगी। जहाँ सत्ता पक्ष इसे जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला सत्र बता रहा है, वहीं एआईयूडीएफ (AIUDF) जैसे विपक्षी दलों ने सरकार पर विभाजनकारी नीतियों का आरोप लगाते हुए सदन में कड़े विरोध के संकेत दिए हैं। भाजपा ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। यह सत्र आगामी चुनावों से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का गवाह बनेगा।