बताया जाता है कि नेतरहाट के बटुआ टोली के पास बटुक नाम के एक युवक का घर था. बटुक मवेशियों को चराने के लिए जंगलों में जाता था. बट्टू की एक खासियत यह थी कि वह काफी मधुर बांसुरी बजाता था. एक दिन अंग्रेज गवर्नर की बेटी अपने घोड़े पर सवार होकर जब सैर करने निकली थी तो उसे जंगल की ओर से बांसुरी की मधुर ध्वनि की आवाज सुनाई दी. अंग्रेज गवर्नर की बेटी मैग्नोलिया बांसुरी की धुन की ओर खिंची चली गई. यहीं से अंग्रेज गवर्नर और चरवाहे के प्रेम की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे यह प्रेम परवान चढ़ने लगा और मैग्नोलिया प्रतिदिन चरवाहे के पास आने लगी और घंटों चरवाहे के पास बैठकर बांसुरी की मधुर धुन सुनती रहती थी.
अंग्रेज गवर्नर को हुई जानकारी तो करवा दिया चरवाहे की हत्या
कहा जाता है कि इश्क और मुश्क कभी छिपता नहीं है. अंग्रेज गवर्नर की बेटी और चरवाहे के बीच की प्रेम कहानी भी लोगों की जुबान पर आने लगी थी. धीरे-धीरे इस बात की जानकारी अंग्रेज गवर्नर को भी हो गई. जब गवर्नर को यह पता चला कि उसकी बेटी एक चरवाहे से प्रेम करती है तो वह आग बबूला हो गया. अंग्रेज गवर्नर ने सबसे पहले अपनी बेटी को अपने घर में ही नजरबंद कर दिया और चरवाहे बटुक की हत्या करवाकर उसे पहाड़ी के नीचे सिपाहियों से फेंकवा दिया.
प्रेमी की बिरह में मैग्नोलिया ने जान देकर अपने प्रेम को बना दिया अमर
इधर, कुछ दिन बीतने के बाद जब अंग्रेज गवर्नर ने अपनी बेटी को बाहर घूमने जाने की इजाजत दी तो मैग्नोलिया अपने घोड़े पर सवार होकर चरवाहे से मिलने के लिए पहुंची. परंतु काफी खोजबीन करने के बाद भी उसे न तो बटुक की कोई जानकारी मिल पाई और न ही उसकी बांसुरी की धुन सुनाई दी. लगातार कई दिनों तक अपने प्रेमी को पागलों की तरह जंगलों में ढूंढते रहने के बावजूद भी जब मैग्नोलिया को बटुक की जानकारी नहीं मिली तो वह कुछ ग्रामीणों से पूछताछ करने लगी. हालांकि अंग्रेज गवर्नर के डर से कोई भी ग्रामीण पहले तो कुछ बताने को तैयार नहीं थे ,परंतु एक वृद्ध ग्रामीण ने मैग्नोलिया की हालत पर तरस खाकर उसे पूरी घटना की जानकारी दे दी. घटना की जानकारी होने के बाद मैग्नोलिया बिरह की वेदना में विचलित हो गई. वह अपने घोड़े के साथ उसी स्थान पर गई जहां से चरवाहे को खाई में फेंका गया था. मैग्नोलिया भी अपने घोड़े के साथ पहाड़ की चोटी से खाई में छलांग लगा दी और अपनी जान देकर अपने प्रेम को अमर बना दिया.
बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने आते हैं
घटना के सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी यहां पहुंचने वाले लोग अमर प्रेम की वेदना और बलिदान को महसूस करते हैं. पर्यटक विकास कुमार और आशीष कुमार ने कहा कि यह स्थान अमर प्रेम की निशानी है. यहां आकर काफी सुकून महसूस हो रहा है. पर्यटकों ने बताया कि पहले तो उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी परंतु यहां आने के बाद ही यह पता चला कि नेतरहाट अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ अमर प्रेम की निशानी भी अपनी गोद में छुपाए हुए है.
मैग्नोलिया पॉइंट को सुरक्षा की जरूरत
नेतरहाट से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मैग्नोलिया पॉइंट अमर प्रेम के साथ-साथ सन सेट प्वाइंट के रूप में भी जाना जाता है. लेकिन लापरवाही के कारण यह जगह धीरे-धीरे उपेक्षित होती जा रही है. घोड़ा तथा अंग्रेज गवर्नर की बेटी और चरवाहे की जो प्रतीकात्मक मूर्ति लगाई गई है वह भी अब बदहाल हो गई है. जरूरत इस बात की है कि सरकार और प्रशासन ऐसे स्थानों को सुरक्षित करें ताकि यहां पर्यटकों का आगमन अधिक से अधिक हो सके.