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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा

इमरान खान की सेहत पर चिंता

इस्लामाबादः पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में से एक और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की सेहत को लेकर आई ताजा रिपोर्टों ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के वकीलों ने आज देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष एक बेहद चिंताजनक जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि जेल में उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और कथित प्रताड़ना के कारण खान की दाहिनी आंख की रोशनी घटकर मात्र 15 प्रतिशत रह गई है। इस खबर के बाहर आते ही न केवल पाकिस्तान, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

मामले की संवेदनशीलता और पूर्व प्रधानमंत्री की स्थिति को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह अविलंब एक स्वतंत्र और उच्च-स्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन करे। इस बोर्ड में देश के जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन शामिल होंगे, जो किसी भी राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर खान की सेहत की जांच करेंगे। अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट 48 घंटों के भीतर पेश की जाए ताकि यह तय किया जा सके कि उन्हें जेल में ही उपचार दिया जाए या किसी विशेष अस्पताल में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।

इमरान खान के वकीलों और पीटीआई समर्थकों का आरोप है कि जेल प्रशासन उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रहा है। आरोप लगाया गया है कि उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है और उनकी बुनियादी जरूरतों के साथ समझौता किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इमरान खान की सेहत को लेकर जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है, जहाँ उनके समर्थक जेल प्रशासन और वर्तमान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि एक पूर्व प्रधानमंत्री और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व के साथ इस तरह का व्यवहार पाकिस्तान की लोकतांत्रिक साख को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार और जेल अधिकारियों ने इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार का तर्क है कि इमरान खान को जेल नियमावली के अनुसार हर संभव सुविधा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। उनका कहना है कि पीटीआई नेतृत्व जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए हेल्थ कार्ड का उपयोग कर रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में वर्तमान आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच इमरान खान की सेहत से जुड़ी कोई भी अनहोनी देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को जन्म दे सकती है।

अगले 48 घंटे पाकिस्तान की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट वकीलों के दावों की पुष्टि करती है, तो सरकार पर उन्हें रिहा करने या किसी वीआईपी अस्पताल (जैसे शौकत खानम अस्पताल) में भेजने का भारी दबाव होगा। इमरान खान की सेहत अब केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता के लिए एक अग्निपरीक्षा बन गई है।