Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IRCTC Tour: रांची के श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! भारत गौरव ट्रेन से करें 6 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा,... Nalanda Temple Stampede: बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौ... IPL 2026: रवींद्र जडेजा का इमोशनल पल, लाइव मैच में रोने के बाद 'पुराने प्यार' को किया किस। Honey Singh Concert: हनी सिंह के कॉन्सर्ट में सुरक्षा के साथ खिलवाड़! चेतावनी के बाद भी तोड़े एयरपोर... Financial Deadline: 31 मार्च तक निपटा लें ये 6 जरूरी काम, वरना कटेगी जेब और भरना होगा भारी जुर्माना New IT Rules 2026: बदल जाएंगे डिजिटल नियम, केंद्र सरकार के आदेश को मानना अब सोशल मीडिया के लिए होगा ... Hanuman Ji Puja Rules for Women: महिलाएं हनुमान जी की पूजा करते समय न करें ये गलतियां, जानें सही निय... पुराना मटका भी देगा फ्रिज जैसा ठंडा पानी, बस अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स। Baisakhi 2026: बैसाखी पर पाकिस्तान जाएंगे 3000 भारतीय सिख श्रद्धालु, ननकाना साहिब और लाहौर के करेंगे... Puducherry Election: पुडुचेरी में INDIA गठबंधन की बढ़ी टेंशन, 'फ्रेंडली फाइट' से बिखर सकता है खेल!

बंबई हाईकोर्ट ने भगोड़े विजय माल्या की कड़ी फटकार लगायी

आपकी बात तभी सुनेंगे जब आप यहां हाजिर होंगे

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को भगोड़े के रूप में यूनाइटेड किंगडम में रहकर भारतीय अधिकारियों से बचने और साथ ही अदालत से राहत पाने की कोशिश करने पर विजय माल्या के प्रति सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखाड़ की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि माल्या चाहते हैं कि अदालत भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर विचार करे, तो उन्हें भारत लौटना होगा।

पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा, आपको वापस आना होगा। यदि आप वापस नहीं आ सकते, तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। अदालत माल्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने आर्थिक अपराध कानून और खुद को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने की कार्यवाही को चुनौती दी थी।

अदालत की यह टिप्पणी उसके 23 दिसंबर के उस आदेश के संदर्भ में आई है, जिसमें माल्या को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया गया था कि वह ब्रिटेन से भारत कब लौटने का इरादा रखते हैं। अदालत ने यह भी साफ कर दिया था कि जब तक वह अदालत के अधिकार क्षेत्र के प्रति खुद को समर्पित नहीं करते, तब तक अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी दलीलें नहीं सुनी जाएंगी।

अदालत ने नोट किया कि इन निर्देशों के बावजूद माल्या भारत लौटने के अपने इरादे पर हलफनामा देने में विफल रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की, आप (भारतीय और यूके) अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, इसलिए आप एफईओ एक्ट को चुनौती देने वाली वर्तमान याचिका का लाभ नहीं उठा सकते।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि माल्या भारत आकर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन वे इस देश के कानून पर अविश्वास करते हुए समानता के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि माल्या ने 2018 के अधिनियम को तभी चुनौती दी जब वह भगोड़ा बन गए और लंदन में उनके प्रत्यर्पण की कार्यवाही अंतिम चरण में थी।

माल्या के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने तर्क दिया कि कानून की प्रकृति को देखते हुए माल्या को भारत आए बिना भी सुना जा सकता है। हालाँकि, पीठ ने जोर देकर कहा कि पिछले आदेश का पालन नहीं किया गया है। अदालत ने मामले को अगले सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए कहा, हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं, बल्कि आपको एक और अवसर दे रहे हैं।