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Digvijaya Singh News: दिग्विजय सिंह के उस पुराने ‘ऑफर’ का अब जिक्र क्यों? पार्टी के लिए चेतावनी या नेता की उपेक्षा का दर्द

सागर: मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और निगम मंडल की नियुक्तियों का इंतजार बेसब्री से हो रहा है क्योंकि सरकार को 2 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. कई नेता मंत्रिमंडल विस्तार, तो कई नेता निगम मंडल के जरिए लाल बत्ती हासिल करना चाह रहे हैं.

इस सब के बीच भाजपा के दिग्गज नेता दर्द और उपेक्षा को लेकर मन की पीढ़ा भी व्यक्त कर रहे हैं. ये दूसरा मौका है,जब मध्य प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अपना दर्द बयां किया है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि गोपाल भार्गव भाजपा को चेतावनी तो नहीं दे रहे या फिर अपनी उपेक्षा का दर्द बांट रहे हैं.

गोपाल भार्गव का फिर छलका दर्द

1985 से भाजपा की झोली में लगातार रहली विधानसभा की सीट डाल रहे पूर्व मंत्री, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और लगातार 9 बार के विधायक गोपाल भार्गव को उनकी उपेक्षा अब सहन नहीं हो रही है. उनका दर्द किसी ना किसी बहाने अब सार्वजनिक रूप से झलक रहा है. हालांकि सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल में शामिल ना किए जाने पर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की थी लेकिन पार्टी ने उन्हें संभाल लिया था, वो कई दिनों तक चुप रहे और इंतजार करते रहे.

अब सार्वजनिक तौर पर उनके ऐसे बयान सामने आ रहे हैं, जो पार्टी से नाराजगी और भविष्य की गोपाल भार्गव की राजनीति की तरफ सोचने पर मजबूर कर रहे हैं. सोमवार को रहली विधानसभा के जूड़ा में एक भूमिपूजन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दलबदल की राजनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि किस तरह उन्हें दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में आने कई बार ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने पार्टी के साथ धोखा नहीं किया.

‘मैंने 20 साल मन को बांधे रखा’

भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि “कोई भी व्यक्ति संघर्ष करता रहे, जूझते रहे और अपनी मांग करता रहे और फिर भी सरकार नहीं माने, तो शायद कोई भी आदमी होगा, उसका हौसला टूट जाएगा. उसकी ताकत कम हो जाएगी, खत्म हो जाएगी, मन गिर जाएगा. लेकिन मैंने 20 साल मन को बांधे रखा.

कई मंत्री, मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते थे कि अरे गोपाल जी क्या वहां बीजेपी में रखा है. कुछ नहीं आप हमारे साथ आ जाओ, आपको बढ़िया विभाग का मंत्री बना देंगे. मैंने उनसे हमेशा कहा कि राजा साहब एकबात कहता हूं कि ये माल जो है, ये टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं है. खूब लालच दिए गए. मैं 20 साल विपक्ष में रहा, लोग 20 महीने में पलटी मार देंगे लेकिन हमनें कोशिश की कि अपनी सरकार आएगी, तो क्षेत्र का विकास करा लेंगे. मैं जनता का भी आभारी हूं कि उन्होंने मुझे परेशान नहीं किया.”

उपेक्षा से जोड़ा जा रहा है बयान

गोपाल भार्गव ने इसी मंच से ये भी कहा कि मैनें पार्टी को जीवन दिया, पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया. उनके इस बयान को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि गोपाल भार्गव अब इंतजार के नहीं, बल्कि अपने मन की पीढ़ा को सार्वजनिक करने का मन बना चुके हैं. क्योंकि उन्हें अंदाजा नहीं था कि निर्विवाद राजनीति और बिना किसी आरोप के सबसे वरिष्ठ विधायक होने के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी. 2 साल बीत जाने के बाद गोपाल भार्गव का इंतजार जारी है.

गोपाल भार्गव ने पिछले दिनों ब्राह्मण सम्मेलन में देश के हालातों को ब्राह्मणों के लिए चिंताजनक करार दिया था. माना जा रहा था कि यूजीसी के बहाने उन्होंने अपना दर्द बयां किया था. अब दलबदल पर चर्चा कर उन्होंने बताया है कि आयाराम-गयाराम की तर्ज पर मैं भी कांग्रेस में जा सकता था.