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अवामी लीग के हिंदू नेता की हिरासत में मौत

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान

ढाकाः बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर राजनीतिक अस्थिरता की चपेट में है। पूर्व जल संसाधन मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन (85 वर्ष) की शनिवार को दिनाजपुर जिला जेल की हिरासत में हुई मौत ने देश के सुलगते माहौल में घी का काम किया है। 12 फरवरी, 2026 को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले हुई इस घटना ने कार्यवाहक सरकार और सुरक्षा बलों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है।

अवामी लीग के प्रेसिडियम सदस्य रमेश चंद्र सेन अगस्त 2024 से जेल में थे। उनकी मौत के बाद विपक्षी खेमे में भारी रोष है। विपक्ष का आरोप है कि 85 वर्षीय बुजुर्ग नेता को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, जबकि वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। इस घटना और पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं की निरंतर गिरफ्तारियों के विरोध में अवामी लीग समर्थित गुटों ने 24 घंटे के राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। ढाका के मीरपुर और ढाका यूनिवर्सिटी क्षेत्र में पिछले कुछ घंटों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच छिटपुट झड़पें और टायर जलाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार ने इन गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए कहा है कि ये कार्रवाई भ्रष्टाचार और पिछली सरकार के दौरान हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच का हिस्सा है। दूसरी ओर, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिरासत में होने वाली मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। सरकार ने उपद्रवियों से निपटने के लिए अर्धसैनिक बल को हाई अलर्ट पर रखा है।

राजनीतिक अस्थिरता का सबसे घातक प्रहार बांग्लादेश की जीवनरेखा माने जाने वाले रेडीमेड गारमेंट उद्योग पर पड़ा है। गाजीपुर और सावर जैसे औद्योगिक हब में हिंसा की आशंका के चलते कई फैक्ट्रियों ने अनिश्चितकालीन शटडाउन की घोषणा कर दी है। बांग्लादेश के कुल निर्यात का 80 फीसद से अधिक हिस्सा गारमेंट क्षेत्र से आता है। बार-बार के बंद से अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब वियतनाम और भारत जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। फैक्ट्रियों के बंद होने से लाखों श्रमिकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

ढाका में स्थित भारतीय उच्चायोग ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिकों और विशेषकर वहां पढ़ रहे मेडिकल छात्रों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। उन्हें अनावश्यक यात्रा से बचने, प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और अपने स्थानीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। भारत ने अपने राजनयिकों के परिवारों को भी एहतियातन स्वदेश लौटने का सुझाव दिया है।