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Ramgarh News: प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना BFCL प्लांट! बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, प्रबंधन ने दी सफाई

रांची: रामगढ़ जिले में स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड (BFCL) प्लांट से फैल रहा प्रदूषण अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. इस औद्योगिक इकाई में इंगोट (लोहे/स्टील के ठोस सांचे) का निर्माण किया जाता है, लेकिन उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला घना और जहरीला धुआं आसपास के इलाकों में सांस लेना मुश्किल कर रहा है. मामले को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाया है. हालांकि प्लांट प्रबंधन की कुछ और ही दलील है.

मुख्यमंत्री और रामगढ़ डीसी से सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और रामगढ़ उपायुक्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टैग करते हुए एक वीडियो साझा किया है. वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई देने वाला प्रदूषण का गुब्बार न तो पुलिस प्रशासन को नजर आता है, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को और न ही राज्य सरकार को.

विभागीय अधिकारियों पर कटाक्ष

मरांडी ने कहा कि एक ओर आम जनता दमघोंटू हवा में जीने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी एयर प्यूरीफायर लगाकर सुरक्षित माहौल में बैठे हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन अक्सर बैरिकेडिंग कर दोपहिया वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच में व्यस्त रहता है, लेकिन बड़े औद्योगिक प्लांटों से हो रहे प्रदूषण पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती.

मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड को प्रकृति ने खनिज संसाधनों का अनमोल उपहार दिया है, लेकिन सरकार द्वारा खनिजों के अंधाधुंध दोहन और उद्योगों को खुली छूट देने की नीति अब राज्य के लोगों के लिए अभिशाप बनती जा रही है. नेता प्रतिपक्ष ने रामगढ़ के उपायुक्त से मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर जिले में संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर BFCL जैसे इंगोट निर्माण प्लांटों के प्रदूषण नियंत्रण मानकों की सघन और निष्पक्ष जांच कराई जाए.

प्लांट प्रबंधन की सफाई

इधर, ईटीवी भारत के संवाददाता ने प्लांट के समीप जाकर देखा तो अभी किसी तरह के धुंए का गुब्बार नजर नहीं आया. इस बाबत प्लांट के पीआरओ रुपेश कुमार से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि जिस वीडियो की बात की जा रही है, वह साल 2025 का है. जब प्लांट के विस्तारीकरण के दौरान तकनीकी खराबी की वजह से धुएं का गुब्बार उठा था. वर्तमान में ऐसी कोई बात नहीं है. प्रबंधन की ओर से प्रदूषण मानकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. प्लांट जाकर इसकी पड़ताल की जा सकती है. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट से प्रदूषण हो रहा है.