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संयुक्त किसान मोर्चा ने पीयूष गोयल से इस्तीफा मांगा

प्रधानमंत्री से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के विवरण साझा करते ही संयुक्त किसान मोर्चा ने उनके तत्काल इस्तीफे की मांग कर दी है। सेब और कपास उत्पादकों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि कपास के आयात में किसी भी प्रकार की ढील जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के लिए विनाशकारी साबित होगी।

एक संवाददाता सम्मेलन में एसकेएम नेताओं ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम समझौते का ढांचा अमेरिकी कृषि क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने पूर्ण आत्मसमर्पण है। संयुक्त बयान में शामिल मदों—जैसे सूखे डिस्टिलर्स अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल और वाइन का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि इससे पशु आहार बाजार पर पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा।

नेताओं ने गोयल के उस दावे को गलत बताया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र इस समझौते से बाहर हैं। उन्होंने कहा, डेयरी उत्पाद यूके, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हस्ताक्षरित एफटीए का हिस्सा हैं। नए खुलासों ने साबित कर दिया है कि वाणिज्य मंत्री जानबूझकर झूठ फैला रहे हैं और किसानों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

एसकेएम ने उन्हें ‘देशद्रोही’ करार देते हुए इस्तीफे की मांग की और प्रधानमंत्री को चेतावनी दी कि वे इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से बचें, अन्यथा उन्हें राष्ट्रव्यापी बड़े जन संघर्ष का सामना करना पड़ेगा। नेताओं ने यह भी बताया कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 2023-24 के 0-3 फीसद से बढ़कर 18 फीसद हो गया है, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारतीय टैरिफ, जो कभी 30 फीसद से 150 फीसद के बीच था, अब शून्य कर दिया गया है। इससे भारतीय कृषि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शिकंजे में फंस जाएगी।

राकेश टिकैत ने पशु आहार आयात की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा, किसी किसान ने आयातित पशु आहार नहीं मांगा। कुछ पोल्ट्री समूह मक्का और सोयाबीन आधारित फीड के आयात की मांग कर रहे थे ताकि वे यहाँ इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को कम कर सकें। हमने सुना है कि अमेरिकी पशु आहार में मांसाहारी तत्व भी हो सकते हैं।

सरकार हमारी गायों को मांसाहारी भोजन क्यों खिलाना चाहती है? उन्होंने आरएसएस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि वे ‘मास्टर’ डोनाल्ड ट्रंप के आगे पूरी तरह झुक गए हैं। एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेता और जम्मू-कश्मीर के विधायक एम.वाई. तारिगामी ने कहा कि यह सौदा कश्मीर और हिमाचल की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा।

उन्होंने कहा कि विपणन सुविधाओं की कमी और जलवायु चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। वहीं, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गणात्रा और महाराष्ट्र के किसान नेता अजीत नवले ने भी चिंता जताई कि बिना शुल्क के कपास का आयात भारतीय कपास किसानों की स्थिति को और खराब कर देगा।