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आतंकी गतिविधियों की चर्चा कर हिजबुल्लाह पर हमला

दक्षिण लेबनान सीमा पर इसराइली हवाई हमले

तेल अवीवः इजरायल और लेबनान के बीच खिंची सैन्य लकीरें आज एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गई हैं, जहाँ से वापसी का रास्ता हर बीतते घंटे के साथ संकरा होता जा रहा है। इसराइल और लेबनान की सीमा, जिसे ब्लू लाइन के नाम से जाना जाता है, इस समय बारूद के ढेर में तब्दील हो चुकी है। इसराइली वायुसेना द्वारा दक्षिण लेबनान के विभिन्न अंचलों में किए गए सिलसिलेवार और भीषण हवाई हमलों ने न केवल स्थानीय भूगोल को झकझोर दिया है, बल्कि मध्य पूर्व के पहले से ही सुलगते राजनीतिक परिदृश्य में घी डालने का काम किया है।

इसराइली रक्षा बलों ने अपने आधिकारिक बयानों में इन हमलों को निवारक कार्रवाई करार दिया है। उनका दावा है कि खुफिया जानकारी के आधार पर उन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जहाँ से उत्तरी इसराइल के रिहायशी इलाकों पर बड़े पैमाने पर रॉकेट दागने की रणनीतिक तैयारी की जा रही थी। इसराइल का कहना है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। हाल के घंटों में सीमा के दोनों ओर से हुई भारी गोलाबारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अब केवल छिटपुट झड़प नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है।

दूसरी ओर, लेबनान से आ रही तस्वीरें बेहद भयावह हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों को बल्कि घनी आबादी वाले नागरिक क्षेत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुँचाई है। अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ ठप हो गई हैं। सीमावर्ती गाँवों से हजारों परिवारों का पलायन जारी है, जो अपनी पूरी जिंदगी की जमापूँजी पीछे छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में बेरूत और अन्य शहरों की ओर भाग रहे हैं। यह विस्थापन आने वाले समय में एक बड़े मानवीय शरणार्थी संकट को जन्म दे सकता है।

इस संघर्ष की सबसे खतरनाक बात इसका विस्तारवादी स्वभाव है। लेबनान में सक्रिय सशस्त्र समूहों और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों ने इसराइली हमलों के जवाब में अकल्पनीय जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि इसराइल अपनी जमीनी सेना को लेबनान के भीतर भेजता है, तो यह युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें ईरान समर्थित अन्य गुट और संभावित रूप से अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी सीधे तौर पर शामिल हो सकती हैं। ऐसी स्थिति पूरे मध्य पूर्व के लिए आत्मघाती साबित होगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।