Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
ममता बनर्जी पर भड़के CM मोहन यादव! बोले- 'राष्ट्रपति का अपमान बर्दाश्त नहीं, तुरंत माफी मांगें दीदी'... छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 26 मासूमों की जान लेने वालों पर बड़ा एक्शन! अब 2 और डॉक्टर गिरफ्तार, जेल पहु... T20 World Cup के बीच ICC के फैसले से मचा हड़कंप! इन दिग्गज खिलाड़ियों ने की बगावत, बोले- 'जल्द से जल्... 'सूबेदार' देख गदगद हुए शाहरुख खान! अनिल कपूर के लिए लिखा खास मैसेज, बोले- 'झक्कास से भी ऊपर है किंग ... Women's Day 2026 Special: महिलाओं की चमकेगी किस्मत! इन 5 सरकारी स्कीम में लगाएं थोड़ा-थोड़ा पैसा, मै... गर्मी आने से पहले मची लूट! मात्र 19,000 रुपये में घर लाएं 1 Ton AC, बिजली बिल की भी नो टेंशन; जानें ... नाश्ते में पिएं ये 5 प्रोटीन रिच स्मूदी, दिनभर रहेंगे सुपर एनर्जेटिक; वेट लॉस और मसल बिल्डिंग में भी... ट्रंप का 'मिशन ईरान'! बताया कैसे खत्म होगा युद्ध, खामेनेई के बाद अब कौन है हिट लिस्ट में? तेहरान में... Vastu Tips: गलत दिशा में सिर रखकर सोना बना सकता है कंगाल! जानें वास्तु के अनुसार सोने का सही तरीका, ... Iran Oil Depot Attack: तेहरान में भीषण धमाकों से दहला ईरान, ट्रंप की चेतावनी के बाद तेल डिपो को बनाय...

अमेरिका और रूस के बीच सैन्य संवाद कायम

दोनों महाशक्तियों ने संवादहीनता को तोड़ने की पहल की

वाशिंगटनः वाशिंगटन और मॉस्को के बीच दशकों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता ने हाल के वर्षों में एक ऐसा खतरनाक मोड़ ले लिया था, जिसने पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया था। हालांकि, आज वाशिंगटन से आई एक खबर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा के विशेषज्ञों को थोड़ी राहत दी है। रूस और अमेरिका ने अपने उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद को फिर से शुरू करने का औपचारिक निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दोनों महाशक्तियों के बीच संबंध शीत युद्ध के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं।

पिछले चार वर्षों के दौरान, विशेषकर यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और उसके बाद नाटो के पूर्व की ओर विस्तार को लेकर, रूस और अमेरिका के बीच संचार के सभी औपचारिक रास्ते लगभग बंद हो गए थे। जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच बातचीत बंद हो जाती है, तो गलतफहमी का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इतिहास गवाह है कि कई बार युद्ध इरादतन नहीं, बल्कि सामने वाले की गतिविधियों को गलत समझने के कारण शुरू हुए हैं। इसी जोखिम को कम करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष जनरलों ने एक बार फिर हॉटलाइन को सक्रिय करने और एक-दूसरे के सैन्य इरादों को स्पष्ट करने पर सहमति जताई है।

इस बैठक में केवल पारंपरिक युद्ध तक ही सीमित चर्चा नहीं हुई, बल्कि भविष्य के युद्ध क्षेत्रों यानी अंतरिक्ष और साइबर स्पेस पर भी विस्तार से बात की गई। दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में शीर्ष सैन्य कमांडर सीधे एक-दूसरे से संपर्क करेंगे, ताकि किसी भी स्थानीय झड़प को बड़े युद्ध में बदलने से रोका जा सके।

अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र: वर्तमान युग में उपग्रहों को निशाना बनाना या एक-दूसरे के बिजली ग्रिडों पर साइबर हमला करना युद्ध की घोषणा माना जा सकता है। बैठक में यह तय किया गया कि इन क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों की स्पष्ट व्याख्या की जाएगी ताकि कोई भी पक्ष अनजाने में रेड लाइन पार न करे। इस संवाद बहाली के बावजूद, दोनों देशों के मौलिक मतभेदों में कोई कमी नहीं आई है।

क्रेमलिन ने स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य संचार की बहाली का अर्थ यह नहीं है कि रूस अपनी सुरक्षा मांगों से पीछे हट जाएगा। रूस का तर्क है कि नाटो का विस्तार उसके अस्तित्व के लिए खतरा है। हालांकि, मॉस्को ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिका के साथ सीधे सैन्य संघर्ष से बचना उसके अपने और वैश्विक हित में है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने सावधानी बरतते हुए यह स्पष्ट किया है कि यह संवाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता या अमेरिकी नीति में किसी भी तरह के बदलाव का संकेत नहीं है। अमेरिका के लिए यह संघर्ष प्रबंधन का एक जरिया है, न कि रूस के साथ किसी स्थायी मित्रता की शुरुआत।