Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पकौड़ी के लिए 'जंग' और फिर मातम! बड़ी बहन से झगड़े के बाद छोटी ने खाई सल्फास की गोली; तड़प-तड़प कर न... ई-रिक्शा में 'खौफ' की वो रात! ड्राइवर ने बदला रास्ता तो युवती ने मचाया शोर; किडनैपिंग की आशंका में भ... छत्तीसगढ़ के खल्लारी मंदिर में 'मौत का रोपवे'! केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, एक महिला की मौत और 16... PSL 2026 पर टूटा दुखों का पहाड़! 8 बड़े खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को दिखाया ठेंगा; IPL के लालच में छोड़... पवन कल्याण का पावर पैक्ड धमाका! 'धुरंधर' के शोर में भी 'उस्ताद भगत सिंह' ने तोड़े रिकॉर्ड; 3 दिन में... Iran-Israel War 2026: ईरान ने इजराइल पर बरपाया कहर, 100 से ज्यादा जख्मी; पीएम नेतन्याहू ने तेहरान पर... WhatsApp की बड़ी 'जादूई' ट्रिक! अब बिना नंबर सेव किए करें किसी को भी मैसेज; बस फॉलो करें ये 2 मिनट वा... Chaitra Navratri Day 4: मां कूष्मांडा को बेहद प्रिय है ये 'एक' सफेद मिठाई! नवरात्रि के चौथे दिन लगाए... गर्मी में 'वरदान' हैं चिया और सब्जा सीड्स! शरीर को रखेंगे AC जैसा ठंडा, बस भूलकर भी न करें ये एक गलत... थावे मंदिर में 'प्रसाद' के नाम पर गुंडागर्दी! दुकानदारों ने श्रद्धालुओं को लाठियों से पीटा; "हमसे ही...

स्पेन और ग्रीस भी सोशल मीडिया के खिलाफ

यूरोप में डिजिटल कर्फ्यू का दौर और व्यापक हुआ

मैड्रिड/एथेंस: युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में यूरोपीय संघ के दो प्रमुख देशों, स्पेन और ग्रीस ने एक ऐतिहासिक पहल की है। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से एक डिजिटल सुरक्षा कानून प्रस्तावित किया है, जिसे आम बोलचाल में डिजिटल कर्फ्यू कहा जा रहा है। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों से पूरी तरह दूर रखना है।

प्रस्तावित कानून के अनुसार, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म अब 16 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए प्रतिबंधित होंगे। यह केवल एक सुझाव नहीं बल्कि एक कड़ा कानूनी प्रावधान है। कानून की सबसे बड़ी विशेषता इसका एज वेरिफिकेशन (आयु सत्यापन) तंत्र है। अब कंपनियों को केवल एक साधारण क्या आप 18 वर्ष के हैं? वाले बॉक्स से काम नहीं चलेगा; उन्हें सरकारी डेटाबेस या बायोमेट्रिक पहचान के जरिए उपयोगकर्ता की सटीक उम्र सुनिश्चित करनी होगी।

इस घोषणा ने सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों में हड़कंप मचा दिया है। कानून के उल्लंघन की स्थिति में सजा का प्रावधान अत्यंत कठोर रखा गया है। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर उनके कुल वैश्विक टर्नओवर का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह राशि अरबों डॉलर में हो सकती है। सरकारों को यह अधिकार होगा कि वे कंपनियों के एल्गोरिदम की जांच कर सकें कि वे बच्चों को लक्षित तो नहीं कर रहे हैं।

स्पेन के शिक्षा मंत्री ने इस कदम का बचाव करते हुए एक प्रेस वार्ता में कहा, स्मार्टफोन की लत और सोशल मीडिया पर मिलने वाला डोपामाइन हमारे युवाओं की एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है। हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक डिजिटल भूलभुलैया में खोने नहीं दे सकते। शिक्षकों और मनोवैज्ञानिकों के समूहों ने इस पहल को साहसिक और आवश्यक बताया है। उनका तर्क है कि साइबर बुलिंग, बॉडी डिस्मोर्फिया (अपने शरीर को लेकर हीन भावना) और नींद की कमी जैसे मुद्दे इसी डिजिटल लत की देन हैं।

दूसरी ओर, टेक जगत और कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इसे डिजिटल स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया है। उनका तर्क है कि प्रतिबंध लगाने के बजाय डिजिटल साक्षरता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह कानून पूरे यूरोपीय संघ के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है। यदि स्पेन और ग्रीस इसमें सफल होते हैं, तो फ्रांस और जर्मनी जैसे देश भी इसी राह पर चल सकते हैं।

आने वाले महीनों में इस कानून पर यूरोपीय संसद में बहस होने की संभावना है। यदि यह पारित हो जाता है, तो यह वैश्विक स्तर पर इंटरनेट के उपयोग के तरीके को हमेशा के लिए बदल सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि सोशल मीडिया कंपनियां इस अभूतपूर्व कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं।