कश्मीर के पूर्व डीजीपी ने जनरल नरवणे को सलाह दी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों को लेकर देश के गलियारों में छिड़ा राजनीतिक घमासान अब और तेज हो गया है। इस विवाद में अब सुरक्षा जगत के विशेषज्ञों की राय भी सामने आने लगी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने जनरल नरवणे के लेखन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें वर्दी की मर्यादा याद दिलाई है।
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने कहा कि जनरल नरवणे को अपनी समझदारी का परिचय देना चाहिए था। उन्होंने एक गंभीर टिप्पणी करते हुए लिखा, वर्दीधारी सैनिकों के पास जो अनुभव और सूचनाएं होती हैं, उनका अधिकांश हिस्सा उनके साथ कब्र तक जाना चाहिए। यदि हर कोई गोपनीय बातों को सार्वजनिक करने लगेगा, तो सरकारें कांप उठेंगी। वैद का यह बयान सीधे तौर पर सैन्य गोपनीयता और पद की गरिमा बनाए रखने की ओर इशारा करता है।
संसद में राहुल गांधी का आक्रामक रुख दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की पुस्तक पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने चीन के साथ सैन्य टकराव के मुद्दे को उठाते हुए लेख को सदन के पटल पर रखने और उसकी पुष्टि करने की मांग की। राहुल गांधी का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील मामला है। इस मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
मल्लिकार्जुन खरगे का हमला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मामले में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब में ऐसा क्या है जिससे मोदी सरकार के दिग्गज मंत्री घबरा रहे हैं और इसे प्रकाशित होने से रोका जा रहा है? खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर तथ्यों को छिपाकर लोकतंत्र की आत्मा को चोट पहुँचा रही है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दावों को खारिज करते हुए कहा कि आसन के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए और सदन को गुमराह करने वाले तथ्यों से बचना चाहिए।