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जी 20 का यूनिफाइड डिजिटल करेंसी फ्रेमवर्क

अमेरिकी डॉलर के जंजाल से मुक्त होने की नई राह

ब्राजिलियाः ब्राजील के साओ पाउलो में आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक से पिछले कुछ घंटों में एक ऐसी खबर आई है, जिसने वैश्विक वित्तीय ढांचे की नींव हिला दी है। दुनिया की 20 सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं ने एक साझा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम भविष्य में वैश्विक व्यापार करने के तरीके को पूरी तरह से बदलने वाला माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक समझौते का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर दशकों से चली आ रही निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में, अधिकांश सीमा पार लेनदेन डॉलर के माध्यम से होते हैं, जिसमें मध्यस्थ बैंकों की लंबी श्रृंखला और भारी शुल्क शामिल होता है। नए डिजिटल फ्रेमवर्क के लागू होने से लेनदेन की लागत में 80 प्रतिशत तक की भारी कमी आने का अनुमान है। यह न केवल छोटे देशों के लिए व्यापार आसान बनाएगा, बल्कि वैश्विक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा क्योंकि प्रेषण और व्यापारिक शुल्क लगभग नगण्य हो जाएंगे।

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता डायरेक्ट सेटलमेंट है। अब तक, यदि भारत को ब्राजील के साथ व्यापार करना होता था, तो मुद्राओं को अक्सर पहले डॉलर में बदला जाता था। लेकिन अब, भारत का ई-रुपया, चीन का ई-युआन और ब्राजील का ड्रेक्स एक एकीकृत ब्लॉकचेन आधारित प्लेटफॉर्म पर सीधे विनिमय किए जा सकेंगे। इसमें किसी तीसरे पक्ष या मध्यस्थ बैंक की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे लेनदेन कुछ दिनों के बजाय कुछ सेकंडों में पूरा हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास स्विफ्ट बैंकिंग संदेश प्रणाली के वैश्विक एकाधिकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले 12 घंटों में वैश्विक शेयर बाजारों और वित्तीय गलियारों में इस पर सकारात्मक हलचल देखी गई है। यह प्रणाली विकासशील देशों को वित्तीय संप्रभुता प्रदान करेगी, जिससे वे किसी भी भू-राजनीतिक दबाव या प्रतिबंधों से स्वतंत्र होकर अपना व्यापार जारी रख सकेंगे।

एक नई चुनौती जहां यह समझौता आर्थिक क्रांति का वादा करता है, वहीं इसने साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। डिजिटल मुद्राओं के साथ हैकिंग और डेटा चोरी का खतरा हमेशा बना रहता है। इन चिंताओं को दूर करने के लिए, जी20 ने एक विशेष वैश्विक साइबर कार्यबल के गठन की घोषणा की है। यह कार्यबल यह सुनिश्चित करेगा कि लेनदेन पूरी तरह से सुरक्षित हों और किसी भी देश की वित्तीय स्थिरता को खतरा न पहुंचे।