विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सूचना के बाद चेतावनी जारी दी
जेनेवाः विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले 10 घंटों के भीतर एक आपातकालीन वैश्विक स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदायों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। यह चेतावनी एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के एक नए और अत्यधिक म्यूटेंट स्वरूप के बारे में है, जिसे वैज्ञानिकों ने आधिकारिक तौर पर स्ट्रेन-जेड नाम दिया है। यह वायरस न केवल पक्षियों के लिए घातक है, बल्कि इसकी बदलती प्रकृति ने इसे पहले की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक बना दिया है।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घातक स्ट्रेन पहली बार वियतनाम और थाईलैंड के घनी आबादी वाले पोल्ट्री फार्मों में देखा गया था। हालांकि, पिछले 12 घंटों में प्राप्त नवीनतम पारिस्थितिक डेटा से यह पुष्टि हुई है कि वायरस अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रवासी पक्षियों में फैल चुका है। इसका मतलब है कि यह वायरस अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों तक बहुत तेजी से पहुंच सकता है। प्रवासी पक्षियों के माध्यम से इसका फैलना इसे नियंत्रित करना लगभग असंभव बना देता है।
सबसे अधिक चिंताजनक तथ्य जो डब्ल्यूएचओ ने साझा किया है, वह इस वायरस का ज़ूनोटिक जंप है। प्रयोगशाला विश्लेषणों से पता चला है कि स्ट्रेन-जेड ने स्तनधारियों (जैसे फेरेट्स, सूअर और बिल्लियों) के श्वसन तंत्र में खुद को ढालने की बेहतर क्षमता विकसित कर ली है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले 12 घंटों तक की स्थिति के अनुसार, अभी तक किसी भी मानव-से-मानव संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, इसकी म्यूटेशन दर इतनी अधिक है कि वैज्ञानिक इसे महामारी की संभावना वाला वायरस मान रहे हैं।
जिनेवा में आयोजित वैज्ञानिकों की एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद, संगठन ने दुनिया भर की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से मौजूदा टीकों को स्ट्रेन-जेड के अनुरूप अपडेट करने और उत्पादन तेज करने का आह्वान किया है। कई देशों ने एहतियात के तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया से चिकन और अंडों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकारों को महामारी की तैयारी के तहत एंटी-वायरल दवाओं का स्टॉकपिलिंग शुरू करने की सलाह दी है।
इस खबर का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ घंटों में वैश्विक कृषि बाजारों में पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के बाधित होने के डर से वैश्विक स्तर पर रसद लागत में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।