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मणिपुर जिको-माउंट एसी जंगल में आग जारी, बड़े जंगल तबाह

आग पर काबू पाने में डेढ़ सौ से ज़्यादा जवान

  • क्षेत्रीय अखंडता पर कीकीमि की बड़ी रैली

  • इंफाल वेस्ट से 10 लोग गिरफ्तार, सामान जब्त

  • हिमंता ने घुसपैठ विरोधी रुख का बचाव किया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : मणिपुर के ज़िको और माउंट एसी क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से लगी भीषण आग ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है। आग बुझाने के लिए 150 से अधिक जवानों और स्वयंसेवकों की एक संयुक्त टीम युद्ध स्तर पर जुटी हुई है।

आग बुझाने के अभियान में मणिपुर पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं। दुर्गम पहाड़ियों और खतरनाक ढलानों के बावजूद लगभग 40 स्वयंसेवक माउंट एसी की चोटियों तक पहुँचने में सफल रहे। भारतीय वायु सेना ने भी स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया है और जरूरत पड़ने पर एक हेलीकॉप्टर को स्टैंडबाय पर रखा गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि नागालैंड की ओर से सक्रिय सहयोग की कमी है, जबकि यह साझा वन क्षेत्र है। आशंका है कि यह आग मानवीय लापरवाही का नतीजा है, जिससे जल स्रोतों और वन्यजीवों के आवास को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

शनिवार को इंफाल की सड़कों पर हजारों की संख्या में महिलाएं और छात्र उमड़ पड़े। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (कोकोमी) द्वारा आयोजित इस रैली का मुख्य उद्देश्य मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता, सांस्कृतिक पहचान और स्वदेशी लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की।

सुरक्षा बलों ने इंफाल पश्चिम जिले में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और संचार उपकरण बरामद हुए हैं। राज्य के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुल 114 चेकपॉइंट बनाए गए हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपने सख्त रुख का बचाव किया है। तुषार गांधी के एक सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि महात्मा गांधी आज जीवित होते, तो वे असम की पहचान बचाने की इस लड़ाई का समर्थन करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध अप्रवासन के खिलाफ खड़ा होना नफरत फैलाना नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने राजनीतिक धमकियों की निंदा करते हुए कहा कि सरकारें चुनाव से चुनी जाती हैं, न कि दबाव से।