आम नागरिकों के लिए उम्मीद की नई किरण
तेल अवीवः गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी संघर्ष और मानवीय संकट के बीच राफा क्रॉसिंग का खुलना केवल एक सीमा द्वार का खुलना नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए जीवन की एक नई डोर है। गाजा के निवासियों के लिए यह क्रॉसिंग चिकित्सा उपचार, शिक्षा और बिछड़े हुए परिवारों से मिलने का एकमात्र जरिया है।
महीनों के पूर्ण अलगाव के बाद, अब इस क्रॉसिंग के खुलने की खबरों ने आम फिलिस्तीनियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, राफा क्रॉसिंग के लंबे समय तक बंद रहने की कीमत गाजा के लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। आंकड़े बताते हैं कि 1,000 से अधिक मरीजों की मौत केवल इसलिए हो गई क्योंकि वे विदेश जाकर इलाज कराने के लिए अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे थे।
गाजा के स्वास्थ्य सूचना केंद्र के निदेशक जहेर अल-वाहिदी के अनुसार, वर्तमान में 20,000 से अधिक नागरिक विदेश जाने की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 4,000 बच्चे और 4,000 कैंसर रोगी शामिल हैं। कई मरीजों की हालत इतनी नाजुक है कि उन्हें तत्काल मेडिकल इवैक्युएशन की आवश्यकता है।
अस्पताल में 100 दिनों से भर्ती घायल फिलिस्तीनी हैथम अल-कानौआ कहते हैं, हमारा जीवन इस क्रॉसिंग से बंधा है। अगर यह खुलता है, तो हमें जीवन मिलता है; यदि यह बंद रहता है, तो हम एक तरह की नैदानिक मृत्यु की स्थिति में रहते हैं। इस क्रॉसिंग के बंद होने से केवल मरीज ही नहीं, बल्कि युवा छात्र भी प्रभावित हुए हैं।
गाजा के भीतर सीमित संसाधनों के कारण कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों पर निर्भर हैं। सईद मसूद जैसे छात्रों का कहना है कि क्रॉसिंग का खुलना उनके करियर और जीवन को आगे बढ़ाने के लिए अनिवार्य है। बिना इसके, हजारों युवाओं का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका हुआ है।
राफा क्रॉसिंग के बंद होने का सबसे मार्मिक पहलू परिवारों का अलगाव है। अयमान अबू शनाब जैसे हजारों लोग अपने परिजनों से सालों से दूर हैं। अयमान की पत्नी और घायल ससुर हवाई हमले के बाद इलाज के लिए गाजा से बाहर गए थे, लेकिन क्रॉसिंग बंद होने के कारण वे पिछले दो सालों से नहीं मिल पाए हैं।
गाजा के लोगों के लिए राफा क्रॉसिंग महज ईंट और पत्थरों का एक रास्ता नहीं है, बल्कि यह उनके सामान्य जीवन की ओर लौटने का प्रवेश द्वार है। युद्ध और घेराबंदी के बीच, इस द्वार का खुलना एक मानवीय आवश्यकता है जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब गंभीरता से ले रहा है।