बांग्लादेश के चुनाव पर व्यापक हिंसा का अंदेशा
ढाकाः बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी और सुरक्षा चिंताएं अपने चरम पर हैं। ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक ताजा सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए राजनीतिक हिंसा और चरमपंथी हमलों की चेतावनी दी है। यह चुनाव शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश के भविष्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे चुनावी रैलियों, मतदान केंद्रों और धार्मिक स्थलों के पास सतर्क रहें। दूतावास के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी अचानक हिंसक रूप ले सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने 10 फरवरी से मोटरसाइकिलों और 11-12 फरवरी को सभी प्रकार के परिवहन पर कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
इस बार मतदाता न केवल नई संसद चुनेंगे, बल्कि एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह में भी भाग लेंगे। यह जनमत संग्रह जुलाई चार्टर पर आधारित है, जिसे 2024 के छात्र आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार द्वारा तैयार किया गया है। यदि जनता हाँ चुनती है, तो अगली संसद इन सुधारों को लागू करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगी।
किसी भी व्यक्ति के लिए प्रधानमंत्री पद पर रहने की सीमा अधिकतम 10 वर्ष (दो कार्यकाल) तय की जाएगी। देश में एक उच्च सदन का गठन होगा, जो संवैधानिक संशोधनों पर नियंत्रण रखेगा। आधिकारिक पहचान बंगाली के स्थान पर बांग्लादेशी की जाएगी, ताकि सभी जातीय समूहों को समाहित किया जा सके। न्यायपालिका और चुनाव आयोग को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने के लिए नई नियुक्त प्रक्रिया शुरू होगी।
चुनाव में लगभग 2,000 उम्मीदवार 300 संसदीय सीटों के लिए मैदान में हैं। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध के कारण वह इस दौड़ से बाहर है। वर्तमान में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी मुख्य दावेदार के रूप में उभरी है। वहीं, अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन की हाल ही में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान से हुई मुलाकात ने कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह शांतिपूर्ण और समावेशी चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ काम करने को तैयार है।
चुनाव आयोग ने सरकारी अधिकारियों को हाँ वोट के पक्ष में प्रचार करने से सख्ती से मना किया है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। यदि जनमत संग्रह में ना की जीत होती है, तो ये सुधार अनिवार्य नहीं रहेंगे और भविष्य की सरकार के विवेक पर निर्भर करेंगे। 16 देशों के अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, जो 17 वर्षों में बांग्लादेश का पहला पूरी तरह स्वतंत्र चुनाव हो सकता है।