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नोबल विजेता अर्थशास्त्री ने अमेरिकी सोच को गलत बताया

भारत को अमेरिका की उतनी जरूरत नहीः अभिजीत बनर्जी

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने हाल ही में संपन्न हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को एक रणनीतिक संरेखण करार दिया है। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह समझौता वाशिंगटन को एक कड़ा संदेश देता है कि हमें अमेरिका की उतनी जरूरत नहीं है, जितनी वह सोचता है।

यह बयान विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए भारी शुल्कों के संदर्भ में आया है। अभिजीत बनर्जी के अनुसार, यह समझौता भारत और यूरोप दोनों की ओर से अमेरिका को यह दिखाने का प्रयास है कि उनके पास वैकल्पिक बाजार मौजूद हैं। बनर्जी का मानना है कि यह समझौता अमेरिका को सौदेबाजी की मेज पर लाने में सहायक हो सकता है।

वर्तमान में अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने और अन्य व्यापारिक असंतुलन के कारण भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया हुआ है। बनर्जी ने चेतावनी दी कि भारत अभी भी पूरी तरह से नहीं समझ पाया है कि ट्रंप प्रशासन भारत के प्रति इतना सख्त क्यों है। इधर ईयू के साथ जनवरी 2026 में संपन्न हुए इस समझौते को दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक सौदों में से एक माना जा रहा है।

यह समझौता भारत के 99 फीसद निर्यात पर से शुल्क समाप्त कर देगा, जबकि भारत यूरोपीय संघ के 97 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर शुल्क कम करेगा। भारत के वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प और समुद्री उत्पादों को यूरोपीय बाजार में सीधी पहुंच मिलेगी। वहीं, यूरोप के लिए वाइन, ऑटोमोबाइल और रसायनों का भारतीय बाजार आसान हो जाएगा।

अभिजीत बनर्जी ने सावधानी बरतते हुए कहा कि केवल समझौता कर लेना काफी नहीं है। उन्होंने भारत की आंतरिक कमियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुदरा विक्रेताओं की नजर में भारतीय आपूर्तिकर्ता धीमे हैं। चीन के पास असाधारण त्वरित टर्नअराउंड क्षमता है। वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश वस्त्र उद्योग में भारत से आगे निकल रहे हैं क्योंकि उनकी आपूर्ति श्रृंखला अधिक विश्वसनीय है। बनर्जी ने जोर दिया कि जब तक भारत अपनी उत्पादन और परिवहन दक्षता को चीन के स्तर तक नहीं ले जाता, तब तक इन समझौतों का पूर्ण लाभ मिलना स्वचालित नहीं होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत पर लगे 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क में से 25 फीसद केवल रूसी तेल की खरीद से जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में संकेत दिया है कि यदि भारत रूसी तेल का आयात कम करता है, तो इन शुल्कों में राहत दी जा सकती है। बनर्जी ने इस स्थिति पर संदेह जताते हुए कहा कि अमेरिका ने अभी तक वास्तविक बातचीत में बहुत कम रुचि दिखाई है।